हरियाणा में बंधुआ मजदूरी का शिकार किशोर: दर्दनाक घटना और सरकारी सहायता
चंडीगढ़ में हुई दिल दहला देने वाली घटना
चंडीगढ़: क्या कोई इंसान इतना निर्दयी हो सकता है कि एक मासूम का हाथ मशीन में कटने पर उसे अस्पताल ले जाने के बजाय खुद ही ब्लेड से उसका बाकी हाथ काट दे? हरियाणा से एक ऐसी ही भयावह घटना सामने आई है, जिसमें बिहार के 15 वर्षीय किशोर के साथ बर्बरता की गई। इस मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग की सख्त कार्रवाई के बाद, राज्य सरकार ने पीड़ित बच्चे को कृत्रिम अंग (आर्टिफिशियल लिंब) के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया है।
कैसे फंसा किशोर दरिंदे के चंगुल में
यह दर्दनाक कहानी पिछले साल अप्रैल 2025 में शुरू हुई। बिहार के किशनगंज का रहने वाला 15 वर्षीय संजय (बदला हुआ नाम) काम की तलाश में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा गया था। एक महीने बाद जब उसका पिता उसे लेने आया, तो दोनों जींद पहुंचे। 26 मई को उन्होंने बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन से फरक्का एक्सप्रेस पकड़ी। इसी दौरान संजय स्टेशन पर खाना और पानी लेने के लिए उतरा, लेकिन ट्रेन छूट गई। उसके पास पैसे और मोबाइल नहीं थे। रोते हुए संजय पर उत्तर प्रदेश के डेयरी संचालक अनिल कुमार की नजर पड़ी, जिसने उसे मदद का झांसा देकर अपनी डेयरी पर ले जाकर बंधुआ मजदूर बना दिया।
चारा मशीन में हाथ कटने की घटना
लगभग दो महीने तक बंधुआ मजदूरी करते हुए एक दिन संजय का बायां हाथ चारा काटने वाली मशीन में आ गया और कोहनी तक कट गया। इंसानियत को शर्मसार करते हुए अनिल कुमार ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय खुद ही एक ब्लेड से उसके लटकते हुए हाथ के हिस्से को काटकर अलग कर दिया। इसके बाद उसने घाव पर दवा लगाई। जब उसे पुलिस की कार्रवाई का डर सताने लगा, तो उसने बच्चे को 10 हजार रुपये देकर पलवल-हसनपुर रोड पर छोड़ दिया और कटे हुए हाथ के टुकड़ों को यमुना नदी में फेंक दिया।
शिक्षक की मदद से अस्पताल पहुंचा संजय
सड़क पर तड़पते हुए संजय को एक शिक्षक ने देखा और नूंह के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। 29 जुलाई को स्थानीय पुलिस ने बच्चे के पिता से संपर्क किया। इसके बाद संजय को पीजीआईएमएस रोहतक भेजा गया, जहां उसकी चार सर्जरी हुईं। गहरे सदमे में होने के कारण संजय शुरुआत में कुछ नहीं बता सका, लेकिन बाद में उसने पुलिस को बताया कि उसे बंधक बनाए जाने के स्थान पर अजान की आवाज सुनाई देती थी और हवाई जहाज नीचे उड़ते थे। मानवाधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया के सुझाव पर पुलिस ने हरियाणा-यूपी बॉर्डर पर तलाशी शुरू की और अंततः 30 दिसंबर 2025 को अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
मानवाधिकार आयोग की पहल पर मिली राहत
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया। आयोग ने 14 मई को कहा कि पीड़ित बच्चे ने न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक पीड़ा भी झेली है और उसे स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ा है। आयोग ने कहा कि इस दर्द की कोई कीमत नहीं हो सकती, लेकिन बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए उसे एक कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिसके लिए कम से कम 10 लाख रुपये का खर्च आएगा। आयोग के आदेश के अनुसार, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने 23 जून को 10 लाख रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी।