हरियाणा में बागवानी बीमा योजना का विस्तार, किसानों को मिलेगी नई सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बैठक
चंडीगढ़, 03 अप्रैल। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MBBY) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करना सरकार की प्राथमिकता है। इस योजना के माध्यम से किसानों को बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा प्रदान की जा रही है। सरकार का उद्देश्य बागवानी को पारंपरिक खेती के विकल्प के रूप में और अधिक लाभकारी बनाना है।
46 फसलों के साथ मधुमक्खी पालकों को भी सुरक्षा
46 फसलों के साथ अब मधुमक्खी पालकों को भी सुरक्षा
प्रदेश सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए 46 बागवानी फसलों को शामिल किया है। इसमें 23 प्रकार की सब्जियां, 21 फल और 2 मसाले शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों को भी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वित्तीय सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में स्थिरता आएगी।
मुआवजे की राशि में होगा बड़ा इजाफा
मुआवजे की राशि में होगा बड़ा इजाफा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित बढ़ी हुई मुआवजा राशि का लाभ किसानों तक बिना किसी देरी के पहुंचाया जाए। सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए मुआवजे के स्लैब में वृद्धि करने का निर्णय लिया है, ताकि फसल खराबे की स्थिति में किसान को उसकी लागत का उचित हिस्सा वापस मिल सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि हर जिले के बागवान इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित कर सकें।
पारदर्शी वितरण और जमीनी निगरानी पर जोर
पारदर्शी वितरण और जमीनी निगरानी पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि योजना का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समय पर पहुंचाना अनिवार्य है। उन्होंने जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने के आदेश दिए ताकि गिरदावरी और नुकसान के आकलन में पारदर्शिता बनी रहे। सरकार का मानना है कि यदि बागवानी क्षेत्र सशक्त होगा, तभी हरियाणा का किसान वैश्विक बाजारों में अपनी उपज की बेहतर ब्रांडिंग कर पाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुआवजे की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाया जाए।