हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर: उद्योग और दफ्तर प्रभावित
हरियाणा बिजली संकट की स्थिति
हरियाणा बिजली संकट समाचार: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का प्रभाव अब बिजली आपूर्ति से आगे बढ़कर उद्योगों, कार्यालयों और आम जनता की दैनिक गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह जैसे क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बाधित होने से औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ है, और बिजली शिकायत केंद्रों तथा विभागीय कार्यालयों में कार्य भी ठप हो गया है। इस बीच, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर सरकार के साथ सहयोग करने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार निजी बिजली वितरण लाइसेंस के निर्णय को अदालत में चुनौती दे रही है, इसलिए कर्मचारियों को आंदोलन के बजाय कानूनी लड़ाई में सहयोग करना चाहिए।
40 हजार बिजली कर्मचारी हड़ताल पर
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर लगभग 40 हजार बिजली कर्मचारी और इंजीनियर तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल 21 अक्टूबर की रात 10 बजे शुरू हुई और 24 अक्टूबर तक चलेगी। कर्मचारियों का विरोध हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के उस निर्णय के खिलाफ है, जिसमें गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है। हड़ताल के कारण राज्य के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति, पेयजल व्यवस्था और औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ है।
औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित
बिजली संकट का असर हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ा है। गुरुग्राम में लगभग 1800 विनिर्माण इकाइयों का काम प्रभावित हुआ है। कुछ क्षेत्रों में 16 घंटे से अधिक समय तक बिजली कटौती की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे परेशान निवासियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। गुरुग्राम जैसे बड़े औद्योगिक केंद्र में बिजली आपूर्ति बाधित होने से मशीनों का संचालन, उत्पादन की समयसीमा और माल की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है।
अनिल विज की अपील- सरकार के साथ आएं
हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। 22 अक्टूबर को दिए बयान में उन्होंने कहा कि सरकार निजीकरण के पक्ष में नहीं है और उसने निजी कंपनी को लाइसेंस देने के निर्णय का विरोध किया था। अब सरकार इस आदेश को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती देने जा रही है। विज ने कर्मचारियों से कहा कि वे हड़ताल का रास्ता छोड़कर सरकार के साथ कानूनी लड़ाई में सहयोग करें।
बिजली कर्मचारियों का विरोध क्यों?
विवाद की जड़ HERC का 19 अक्टूबर 2026 का आदेश है। आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया है। इसके तहत निजी कंपनी नियामकीय और बुनियादी ढांचे संबंधी शर्तें पूरी करने के बाद संबंधित क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को बिजली वितरण की सुविधा दे सकेगी। बिजली कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि इस फैसले से सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था कमजोर हो सकती है और कर्मचारियों की नौकरी और सेवा शर्तों पर असर पड़ सकता है।