☰
×

हरियाणा में बिजली कर्मियों की हड़ताल से बढ़ेगा संकट, 22 से 24 अक्टूबर तक काम ठप

हरियाणा में 22 से 24 अक्टूबर तक बिजली कर्मियों की हड़ताल की घोषणा की गई है, जिससे बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस हड़ताल का मुख्य कारण निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस जारी करना है, जिसके खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया है। हड़ताल के दौरान तकनीकी खराबियों को ठीक नहीं किया जाएगा, जिससे त्योहारी सीजन में अंधेरा छाने का खतरा बढ़ गया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और आगे की रणनीति क्या होगी।
 

हरियाणा में बिजली संकट की आशंका

हरियाणा बिजली कर्मियों की हड़ताल अक्टूबर 2026 : हरियाणा में 22 से 24 अक्टूबर तक बिजली संकट गहरा सकता है। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के खिलाफ बिजली कर्मियों ने पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है। ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान किसी भी तकनीकी खराबी के मामले में बिजली की लाइनें ठीक नहीं की जाएंगी।


हड़ताल का कारण

हरियाणा में बिजली कर्मियों की हड़ताल की तिथि : 22 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस तीन दिवसीय हड़ताल के कारण आम जनता को भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन और इंजीनियरों की संयुक्त समिति ने निजी कंपनी को बिजली वितरण का जिम्मा सौंपने के खिलाफ कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है।


कर्मचारियों का कड़ा रुख

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि 22, 23 और 24 अक्टूबर को किसी भी फीडर या ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी आने पर उसे ठीक नहीं किया जाएगा। इस स्थिति में त्योहारी सीजन के दौरान घरों, अस्पतालों और औद्योगिक क्षेत्रों में घंटों अंधेरा छाने का खतरा बढ़ गया है।


मुख्य विवाद का कारण

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा निजी कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस जारी करना इस विवाद की मुख्य वजह है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि मुनाफे वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश की जा रही है।


बिजली मंत्री का विरोध

प्रदेश के बिजली मंत्री अनिल विज ने भी इस निर्णय का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार और उनका विभाग आयोग के इस निर्णय से सहमत नहीं हैं और वे इसके खिलाफ अपील करेंगे।


हड़ताल की तैयारी

22 से 24 अक्टूबर तक काम ठप : यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी ने बताया कि इन तीन दिनों में सभी बिजली दफ्तरों और सब-स्टेशनों में काम पूरी तरह बंद रहेगा। उन्होंने कहा कि बिजली का निजीकरण जनविरोधी कदम है, जिसके खिलाफ किसान और मजदूर संगठन भी समर्थन देंगे।


आगे की रणनीति

कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त समिति ने कहा है कि यदि सरकार ने निजी कंपनी का आवंटन रद्द नहीं किया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे इन तीन दिनों के दौरान आवश्यक काम पहले ही निपटा लें।