☰
×

हरियाणा में भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित बदलाव: नई शहरी विकास नीति

हरियाणा सरकार भूमि उपयोग और शहरी विकास से जुड़े नियमों में बदलाव की योजना बना रही है। नए प्रस्ताव के तहत, विभिन्न जोनों में गतिविधियों की अनुमति देने के तरीके में बदलाव किया जाएगा। यह बदलाव अभी प्रस्तावित है और लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। जानें कि रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल जोनों में क्या नई पाबंदियाँ लगाई जा सकती हैं और इसका प्रभाव किस प्रकार के शहरों पर पड़ेगा।
 

हरियाणा भूमि उपयोग नियमों में बदलाव


हरियाणा भूमि उपयोग नियम: हरियाणा सरकार भूमि उपयोग और शहरी विकास से संबंधित नियमों में संशोधन करने की योजना बना रही है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने 30 सितंबर को एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है, जिसमें विकास योजना के तहत विभिन्न जोनों में भूमि उपयोग के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में, नियम यह निर्धारित करते हैं कि किसी जोन में कौन सी गतिविधियाँ की जा सकती हैं। नए प्रस्ताव में इसे बदलने का सुझाव दिया गया है, जिसमें हर जोन के लिए उन गतिविधियों की सूची बनाई जाएगी, जिन पर रोक होगी। इसे सरल भाषा में 'जो प्रतिबंधित नहीं है, उसे नियमों के तहत अनुमति दी जा सकेगी' के रूप में समझा जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी कार्य बिना मंजूरी के शुरू किया जा सकेगा। संबंधित लाइसेंस, निर्माण नियम, पर्यावरण संबंधी शर्तें और अन्य आवश्यक अनुमतियाँ लागू रहेंगी।


नया नियम अभी लागू नहीं हुआ

यह बदलाव अभी केवल एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। सरकार ने लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर आपत्तियाँ और सुझाव मांगे हैं। सुझाव प्राप्त होने के बाद सरकार आगे का निर्णय लेगी। हरियाणा सरकार पहले से ही नियमों और अनुमतियों की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में कार्यरत है। जून 2026 में, राज्य सरकार ने अनुपालन को कम करने और मांग के आधार पर भूमि उपयोग योजना को बढ़ावा देने से संबंधित सुधारों की जानकारी दी थी।


मौजूदा नियमों में क्या बदलाव होगा?

वर्तमान में, किसी जोन के लिए यह निर्धारित किया जाता है कि वहाँ कौन-कौन से कार्य किए जा सकते हैं। नए प्रस्ताव में इसके विपरीत उन गतिविधियों की सूची बनाई जाएगी, जिन पर रोक होगी। इसका उद्देश्य भूमि उपयोग से संबंधित अनुमतियों की प्रक्रिया को अधिक सरल और लचीला बनाना है। हालांकि, किसी गतिविधि का प्रतिबंधित सूची में न होना यह नहीं दर्शाता कि उसे अपने आप मंजूरी मिल गई है।


रिहायशी जोन में क्या नहीं होगा?

रिहायशी क्षेत्रों में कई बड़े और भारी उपयोग वाली गतिविधियों पर रोक का प्रस्ताव है। इनमें औद्योगिक इकाइयाँ, औद्योगिक कॉलोनियाँ, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, रीसाइक्लिंग यूनिट, रेडी-मिक्स कंक्रीट प्लांट और हॉट-मिक्स प्लांट शामिल हैं। इसके अलावा, IT पार्क, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, बड़े वेयरहाउस और गैस गोदाम भी रिहायशी जोन में प्रतिबंधित रहेंगे। ट्रांसपोर्ट नगर, बस टर्मिनल, ट्रक पार्किंग, रेलवे यार्ड, एयरपोर्ट और माल की लोडिंग-अनलोडिंग से जुड़ी गतिविधियों पर भी रोक का प्रस्ताव है।


कमर्शियल जोन में भी कई प्रतिबंध

कमर्शियल जोन में रिहायशी कॉलोनियों और औद्योगिक इकाइयों को प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, IT पार्क, डेटा सेंटर, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और रीसाइक्लिंग यूनिट भी इस सूची में शामिल हैं। गैस इंस्टॉलेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कचरा प्रबंधन स्थल, स्लॉटर हाउस, टेनरी, शवदाह या दफन स्थल, खनन और स्टोन क्रशिंग जैसी गतिविधियों पर भी रोक का प्रस्ताव है।


इंडस्ट्रियल जोन में घर और स्कूल नहीं

इंडस्ट्रियल जोन में रिहायशी और कमर्शियल कॉलोनियाँ बनाने की अनुमति नहीं होगी। शैक्षणिक संस्थानों को भी प्रतिबंधित सूची में रखा गया है। इसके अलावा, कृषि, बागवानी, डेयरी और पोल्ट्री फार्मिंग जैसी गतिविधियों पर भी रोक का प्रस्ताव है।


गुरुग्राम और फरीदाबाद पर पड़ेगा असर

प्रस्तावित बदलाव का प्रभाव केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा। इसका संबंध गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और हिसार जैसे शहरों की विकास योजनाओं से भी है। विशेष रूप से, गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भूमि उपयोग से संबंधित मामलों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। यदि कोई गतिविधि प्रतिबंधित सूची में नहीं है, तो उसके लिए नियमों के तहत मंजूरी प्राप्त करना आसान हो सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय सरकार की मंजूरी और लागू नियमों के आधार पर ही होगा। यह अभी एक प्रस्तावित व्यवस्था है और 30 दिनों तक मिलने वाले सुझावों के बाद इसमें बदलाव भी संभव है।