हरियाणा में भूमि रिकॉर्ड में सुधार: सरकारी नाम से होगा मालिकाना हक का स्पष्टता
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चंडीगढ़ . हरियाणा के किसानों, संपत्ति खरीदारों और आम नागरिकों के लिए राजस्व विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रोहतक, हिसार सहित पूरे राज्य में भूमि रिकॉर्ड (जमाबंदी) से संबंधित विवादों का समाधान किया जाएगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने रविवार को अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में एकरूपता लाई जाए। अब जमाबंदी के मालिकाना हक वाले कॉलम में पुराने और भ्रमित करने वाले नामों को हटाकर केवल 'हरियाणा सरकार' का नाम दर्ज किया जाएगा।
मालिकाना हक का भ्रम समाप्त होगा
कई बार जब लोग अपनी भूमि की फर्द निकालते हैं, तो सरकारी भूमि के आगे 'प्रांतीय सरकार' या अन्य अजीब नाम दिखाई देते हैं। इससे असली मालिक की पहचान में कठिनाई होती है। वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि ऐसे असंगत नाम विवादों का कारण बनते हैं। इसलिए, हरियाणा भूमि रिकॉर्ड मैनुअल 2013 के नियमों का पालन करते हुए इन प्रविष्टियों को 'हरियाणा सरकार' के नाम से बदला जाएगा।
सुधार का लाभ आम जनता को
इस महत्वपूर्ण बदलाव का सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। रिकॉर्ड में स्पष्टता आने से भू-माफिया या धोखेबाज सरकारी भूमि को अपनी बताकर किसी भोले-भाले व्यक्ति को नहीं बेच पाएंगे। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि यह सुधार केवल कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक भूमि प्रबंधन में कानूनी स्पष्टता आएगी और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
काश्त और कब्जे के कॉलम में भी बदलाव
नई व्यवस्था के तहत न केवल मालिकाना हक का नाम बदला जाएगा, बल्कि भूमि के उपयोग की स्थिति भी स्पष्ट की जाएगी। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की भूमि के स्वामित्व कॉलम में 'हरियाणा सरकार' लिखा जाएगा। इसके अलावा, उस भूमि पर किस विभाग का कब्जा है या खेती हो रही है, यह जानकारी 'काश्त' (Cultivation) वाले कॉलम में दर्ज की जाएगी। इससे यह जानना आसान होगा कि भूमि किस सरकारी विभाग के पास है।
राजस्व विभाग की भूमि पर भी रहेगा सरकारी मालिकाना हक
कस्टोडियन, सरप्लस या नजूल जैसी राजस्व विभाग की भूमि पर भी मालिकाना हक 'हरियाणा सरकार' के पास रहेगा। इसके साथ ही जमाबंदी के खेती वाले कॉलम में राजस्व विभाग का नाम और नियंत्रण की स्थिति स्पष्ट रूप से लिखी जाएगी। सरकार ने जनवरी और जुलाई 2021 में भी ऐसे निर्देश जारी किए थे, जिन्हें अब सख्ती से लागू किया जा रहा है।