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हरियाणा में मानसून की सक्रियता, भारी बारिश की संभावना

हरियाणा में मानसून की सक्रियता के चलते कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने 12 अगस्त तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद जताई है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। जानें अपने जिले में बारिश की स्थिति और इसके कृषि पर प्रभाव के बारे में।
 

बारिश का सिलसिला 12 अगस्त तक जारी रहेगा


चंडीगढ़: हरियाणा में हाल के दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। इसके चलते प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर जारी है। भारतीय मौसम विभाग ने अगले सप्ताह तक अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है।


मौसम विभाग के अनुसार, पिछले सोमवार को एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ और राजस्थान की मौसम प्रणाली कमजोर पड़ी, जिसके कारण मानसून टर्फ हरियाणा में फिर से सक्रिय हो गया है। बारिश का यह सिलसिला 12 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। हालांकि, 13 से 20 अगस्त के बीच हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद 30 अगस्त तक सूखे और कमजोर मानसूनी हालात देखने को मिलेंगे।


हरियाणा में सामान्य से कम बारिश

हरियाणा में 1 जून से अगस्त के प्रारंभ तक सामान्य वर्षा की तुलना में लगभग 30% कम बारिश हुई है। विभिन्न जिलों में यह कमी 7% से 68% तक है। राज्य के 21 जिलों में मानसूनी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।


फरीदाबाद और पलवल को छोड़कर अन्य सभी जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है। रेवाड़ी में 173.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 221.7 मिलीमीटर है। महेंद्रगढ़ में 189.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 213.3 मिलीमीटर है। हिसार में 99.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 161.1 मिलीमीटर है।


हरियाणा में मानसूनी हवाओं का प्रभाव

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर-पूर्व राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सरकुलेशन बना हुआ है, जिसके कारण हरियाणा में मानसूनी हवाएं आ रही हैं। 7 से 12 अगस्त तक बादलवाही और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। इससे हरियाणा में बारिश के आंकड़ों में सुधार की उम्मीद है।


हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां खरीफ सीजन में धान की रोपाई सबसे अधिक होती है। धान की अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त बारिश आवश्यक है। यदि बारिश कम होती है, तो भूमिगत जल का अधिक उपयोग होता है, जिससे धान के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।