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हरियाणा में मौसम का मिजाज: पश्चिमी विक्षोभ और किसानों की चिंता

हरियाणा में अप्रैल का मौसम इस बार कुछ अलग नजर आ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कई जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, लेकिन किसानों को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल की गुणवत्ता को लेकर चिंता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 15 अप्रैल से तापमान में तेजी से वृद्धि हो सकती है, जिससे हीटवेव जैसी स्थिति बन सकती है। जानें इस मौसम के बारे में और क्या-क्या बदलाव आने वाले हैं।
 

हरियाणा में मौसम का बदलाव

चंडीगढ़, 11 अप्रैल। इस बार हरियाणा में अप्रैल का मौसम कुछ अलग ही नजर आ रहा है। सूरज की गर्मी फिलहाल बादलों के पीछे छिपी हुई है, जिससे दिन और रात का तापमान सामान्य से कम बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम अपडेट के अनुसार, आज 11 अप्रैल से एक नया और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ राज्य में प्रवेश कर रहा है। इसके प्रभाव से सिरसा, फतेहाबाद, पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर जैसे जिलों में आंशिक बादल और हल्की बारिश की संभावना है।


किसानों की चिंता

हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने हरियाणा के किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। खेतों में कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल अब गुणवत्ता के संकट का सामना कर रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पछेती गेहूं के दाने काले पड़ गए हैं, जिससे किसानों को बाजार में उचित दाम मिलना कठिन होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि मौसम फिलहाल शुष्क रहेगा, जिससे किसान कटाई का कार्य पूरा कर सकेंगे। लेकिन कई क्षेत्रों में जमीन गीली होने के कारण कंबाइन मशीनों का संचालन प्रभावित हो रहा है और गेहूं जड़ से उखड़ रहा है।


15 अप्रैल से मौसम में बदलाव

मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, राहत के ये दिन अब गिनती के बचे हैं। 11 अप्रैल की बारिश के बाद 15 अप्रैल से मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा और सूरज की गर्मी तेजी से बढ़ेगी। तापमान में अचानक वृद्धि से हीटवेव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। फिलहाल सुबह और रात की ठंडी हवाएं राहत दे रही हैं, लेकिन अगले सप्ताह से लोगों को भीषण गर्मी का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।


पश्चिमी विक्षोभ का असामान्य सक्रियता

इस वर्ष अप्रैल में बार-बार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ ने मौसम वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है। सामान्यतः अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक हरियाणा में लू चलने लगती है, लेकिन इस बार बादलों की गतिविधियों ने तापमान को नियंत्रित रखा है। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे 15 अप्रैल तक अपने अनाज को सुरक्षित स्थानों या मंडियों में पहुंचा दें, क्योंकि इसके बाद मौसम शुष्क होने से धूल भरी आंधियों का खतरा बढ़ सकता है।