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हरियाणा में स्कूल एडमिशन के लिए नए नियम: पहली कक्षा में न्यूनतम आयु 6 वर्ष

हरियाणा सरकार ने पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की है। यह निर्णय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लिया गया है, जिसमें पहले 5 और 5.5 वर्ष के बच्चों को प्रवेश दिया जाता था। अब, यदि कोई बच्चा अक्टूबर तक 6 वर्ष का हो जाता है, तो उसे दाखिला लेने की अनुमति होगी। शिक्षा विभाग ने उन बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया है जो सत्र शुरू होने के बाद स्कूल पहुंचेंगे। जानें इस नए नियम के बारे में अधिक जानकारी।
 

नए नियमों की जानकारी

चंडीगढ़ . हरियाणा के सभी जिलों में अभिभावकों को अपने बच्चों के स्कूल में दाखिले के लिए नए नियमों को समझना आवश्यक होगा। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों की न्यूनतम आयु 6 वर्ष होनी चाहिए। इस संबंध में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला और खंड शिक्षा अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी किए हैं।


नई शिक्षा नीति के अंतर्गत महत्वपूर्ण परिवर्तन

नई शिक्षा नीति के तहत बड़ा बदलाव


यह निर्णय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए लिया गया है। पिछले सत्रों में 5 और 5.5 वर्ष की आयु वाले बच्चों को दाखिला दिया जा रहा था, लेकिन अब इस छूट को समाप्त कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए 6 वर्ष की आयु अधिक उपयुक्त है।


विशेष प्रावधानों की जानकारी

अक्टूबर तक आयु पूरी करने वालों को राहत


हरियाणा के नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2011 के नियम 10 के तहत एक विशेष प्रावधान भी लागू किया गया है। यदि कोई बच्चा शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद अक्टूबर तक 6 वर्ष का हो जाता है, तो उसे विस्तारित अवधि में दाखिला लेने की अनुमति होगी। जैसे ही बच्चा 6 वर्ष का होगा, वह उसी दिन से पहली कक्षा में प्रवेश का हकदार होगा।


विशेष ट्रेनिंग का प्रावधान

देरी से आने वाले बच्चों के लिए विशेष ट्रेनिंग


शिक्षा विभाग ने उन बच्चों के लिए भी योजना बनाई है जो सत्र शुरू होने के बाद स्कूल में पहुंचेंगे। निदेशालय के अनुसार, 6 महीने की विस्तारित अवधि के बाद आने वाले बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करने के बजाय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करें।