हरियाणा रोडवेज की आर्थिक स्थिति: संकट में ग्रामीण परिवहन
हरियाणा रोडवेज की स्थिति
चंडीगढ़, 21 मई। हरियाणा रोडवेज की सारथी बसें सुबह होते ही गांवों से शहरों की ओर दौड़ने लगती हैं, लेकिन अब ये बसें केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रोजगार की उम्मीदों को भी ले जा रही हैं। हालाँकि, आज ये जीवनरेखा कर्ज और घाटे के संकट में फंसती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में नई बसों को बेड़े में शामिल किया गया, लेकिन समय पर उचित निर्णय न लेने के कारण रोडवेज अब गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
किराए में वृद्धि की आवश्यकता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सरकारी परिवहन अपनाने की अपील की है, लेकिन हरियाणा में इस प्रणाली को मजबूत करने के प्रयास ठंडे बस्ते में हैं। सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि हरियाणा रोडवेज के बस किराए में 2020 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के चलते साधारण बस का किराया कम से कम ₹2 प्रति किलोमीटर होना चाहिए, जबकि लोग अभी भी ₹1 प्रति किलोमीटर पर यात्रा कर रहे हैं।
डीजल की कीमतों में वृद्धि
₹62 का डीजल अब ₹91.50 पार, पर किराया जस का तस
वित्तीय घाटे की स्थिति को समझना आसान है। 2020 में जब किराया तय हुआ था, तब डीजल की कीमत ₹62 प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर ₹91.50 हो गई है। इसके अलावा, बसों के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन में भी वृद्धि हुई है।
वित्तीय स्थिति का विश्लेषण
रोडवेज की वित्तीय स्थिति (प्रति किलोमीटर) राशि (रुपये में)
बस संचालन की वास्तविक लागत ₹73
बस से होने वाली वास्तविक आमदनी ₹39
हर किलोमीटर पर सीधा नुकसान (घाटा) ₹34
2014-15 में परिवहन विभाग का कुल घाटा ₹447 करोड़ था, जो 2021-22 में बढ़कर ₹931 करोड़ और 2022-23 में ₹1000 करोड़ के पार चला गया। इसके बावजूद सरकार किराया बढ़ाने से बचती रही है।
मुफ्त यात्रा की समस्या
42 श्रेणियों को मुफ्त सफर का वीआईपी ट्रीटमेंट
हरियाणा रोडवेज की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करने में मुफ्त सुविधाओं का भी बड़ा हाथ है। पूर्व परिवहन मंत्री ने स्वीकार किया है कि विभाग 42 श्रेणियों के यात्रियों को मुफ्त या रियायती दरों पर यात्रा करवा रहा है।
ग्रामीण इलाकों पर प्रभाव
इस आर्थिक संकट का सबसे बड़ा असर हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। जब डिपो के पास पैसे नहीं होते, तो सबसे पहले गांवों के रूट बंद कर दिए जाते हैं। इससे कॉलेज जाने वाली छात्राएं और किसान प्रभावित हो रहे हैं।
भविष्य की उम्मीदें
अब प्रदेश के युवाओं और किसानों की नजरें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द ही किराया पुनरीक्षण और नीतिगत सुधार नहीं किए, तो हरियाणा रोडवेज को इस संकट से बाहर निकालना मुश्किल होगा।