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हरियाणा सरकार का किसान रजिस्ट्रेशन अभियान: डिजिटलीकरण से मिलेगी सुविधा

हरियाणा सरकार ने 'फार्मर रजिस्ट्री' अभियान को तेज करने का निर्णय लिया है, जिससे किसानों की डिजिटल प्रोफाइल बनाई जाएगी। यह पहल न केवल किसानों की पहचान और भूमि के रिकॉर्ड को एकीकृत करेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी को भी रोकने में मदद करेगी। इसके अलावा, किसानों को अटल सेवा केंद्रों के माध्यम से पंजीकरण कराने की सुविधा मिलेगी। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
 

हरियाणा में किसान रजिस्ट्रेशन की नई पहल

चंडीगढ़, 13 मई। हरियाणा सरकार ने कृषि और राजस्व क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए 'फार्मर रजिस्ट्री' अभियान को तेज करने का निर्णय लिया है। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने बताया कि हर किसान के लिए एक डिजिटल प्रोफाइल बनाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की पहचान और उनकी भूमि के रिकॉर्ड को एकीकृत करना है। इससे सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी और असली हकदार किसानों को समय पर वित्तीय सहायता प्राप्त होगी।


कृषि रिकॉर्ड का परिवार पहचान पत्र से संबंध

हरियाणा में 'परिवार पहचान पत्र' को पहले से ही कई सरकारी सेवाओं का आधार बनाया जा चुका है। अब फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों के डेटा को पीपीपी और भू-अभिलेखों के साथ समन्वयित किया जा रहा है। इससे किसानों को विभिन्न योजनाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। एक बार डिजिटल आईडी बनने के बाद, विभाग के पास किसान की जोत, फसल का प्रकार और बैंक विवरण सुरक्षित रहेगा।


अटल सेवा केंद्रों पर किसानों के लिए विशेष सुविधाएं

ग्रामीण किसानों की सुविधा के लिए हरियाणा सरकार ने सभी अटल सेवा केंद्रों और अंत्योदय केंद्रों को इस कार्य में शामिल किया है। किसान अपनी भूमि के दस्तावेज लेकर यहां पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अलावा, कृषि विभाग के कर्मचारी और पटवारी गांवों में जाकर किसानों को इस प्रक्रिया में सहायता करेंगे। सरकार ने किसानों से अनुरोध किया है कि वे 30 जून 2026 तक अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से पूरा कर लें।


भावांतर भरपाई और बीमा दावों में मिलेगी सहायता

डिजिटल आईडी का सबसे बड़ा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो भावांतर भरपाई योजना या फसल बीमा योजना (PMFBY) का हिस्सा हैं। अक्सर डेटा में असंगति के कारण मुआवजा रुक जाता था, लेकिन अब फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से डेटा सटीक होगा। इससे फसल खराबे की स्थिति में गिरदावरी के बाद मुआवजा राशि सीधे किसान के खाते में बिना किसी देरी के पहुंच जाएगी।


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