हरियाणा सरकार का पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का ऐलान
पूर्व अग्निवीरों के लिए नई सरकारी नीति
केंद्र सरकार ने अग्निवीर योजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य सेना में जवानों की औसत आयु को कम करना था। इस योजना के तहत, लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को कुछ वर्षों की सेवा के बाद बाहर किया जाना था, जिससे उनके भविष्य को लेकर कई सवाल उठे। इस संदर्भ में, केंद्र और राज्य सरकारों ने सुरक्षा बलों और पुलिस में पूर्व अग्निवीरों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। हरियाणा सरकार ने अब इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकारी नौकरियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए अवसर बढ़ाने की घोषणा की है।
आरक्षण की नई व्यवस्था
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। यह नई व्यवस्था एक सितंबर, 2026 से लागू होगी। इसके तहत गृह विभाग में पुलिस सिपाही, इंडियन रिजर्व बटालियन (आइआरबी), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), वन रक्षक, जेल विभाग में वार्डन, खनन रक्षक, वन्य जीव रक्षक और अग्निशामक अधिकारी/चालक के पदों पर 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाएगा। इसमें अनुसूचित जातियों के लिए 2 प्रतिशत, अन्य अनुसूचित जातियों के लिए 2 प्रतिशत, बीसी-ए के लिए 3 प्रतिशत, बीसी-बी के लिए 2 प्रतिशत, ईडब्ल्यूएस के लिए 2 प्रतिशत और अनारक्षित श्रेणी के लिए 9 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है।
भर्ती प्रक्रिया में छूट
ग्रुप-सी पदों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसमें अनुसूचित जातियों के लिए 1 प्रतिशत, बीसी-ए और बीसी-बी के लिए 1 प्रतिशत और शेष 3 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस एवं अनारक्षित श्रेणी के लिए होगा। कौशल विशेषज्ञता से संबंधित ग्रुप-बी पदों पर भी पूर्व अग्निवीरों के लिए 1 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया के दौरान, पूर्व अग्निवीरों को पुलिस सिपाही, वन रक्षक, वार्डर, खनन रक्षक और वन्य जीव रक्षक के पदों के लिए आवश्यक शारीरिक जांच परीक्षा (पीएसटी) से छूट मिलेगी। हालांकि, उन्हें लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा।
सरकार की सराहना
हरियाणा सरकार का यह कदम पूर्व अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने और अग्निवीर योजना को मजबूत करने में सहायक साबित होगा। इस पहल के लिए हरियाणा की नायब सिंह सैनी की सरकार की सराहना की जानी चाहिए।
छवि
लेखक
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक