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हरियाणा सरकार ने मेडिकल रीइंबर्समेंट के लिए आय सीमा बढ़ाई

हरियाणा सरकार ने अपनी मेडिकल रीइंबर्समेंट नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिससे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत मिली है। अब, आश्रितों की मासिक आय सीमा को ₹3,500 से बढ़ाकर ₹9,000 कर दिया गया है, जिससे अधिक परिवार इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जो मौजूदा आर्थिक स्थिति के अनुसार कल्याणकारी नीति को अपडेट करने का प्रयास है।
 

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिली राहत


हरियाणा सरकार ने अपनी मेडिकल रीइंबर्समेंट नीति में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है, जिससे राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिली है। अब, मेडिकल रीइंबर्समेंट लाभ प्राप्त करने के लिए योग्य आश्रितों की मासिक आय सीमा ₹3,500 से बढ़ाकर ₹9,000 कर दी गई है, जिससे अधिक परिवार इस योजना के तहत लाभान्वित हो सकेंगे।


बढ़ी हुई आय सीमा का लाभ

नए नियमों के अनुसार, अब ₹9,000 तक की मासिक आय वाले आश्रितों को मेडिकल रीइंबर्समेंट क्लेम के लिए योग्य माना जाएगा। पिछले कई वर्षों से ₹3,500 की आय सीमा अपरिवर्तित थी, जबकि महंगाई और स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ रहे थे।


स्वास्थ्य विभाग का नया नोटिफिकेशन

हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने 13 जुलाई, 2026 को एक नया नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें 2007 में लागू किए गए मेडिकल रीइंबर्समेंट नियमों में आधिकारिक बदलाव किया गया। यह बदलाव सरकार की वर्तमान आर्थिक स्थिति के अनुसार कल्याणकारी नीति को अपडेट करने का प्रयास है।


फाइनेंस विभाग की मंजूरी

इस बदलाव को लागू करने से पहले, 26 जून, 2026 को फाइनेंस विभाग से प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी मिली थी। इसके बाद, स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी किया, जिससे नए पात्रता मानदंड लागू हो गए।


सभी विभागों को निर्देश

सरकार ने सभी विभागों के प्रमुखों, डिविजनल कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को आदेश भेजे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नए नियमों को लागू करें और सुनिश्चित करें कि योग्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को अद्यतन मेडिकल रीइंबर्समेंट नीति के तहत लाभ मिले।


हजारों परिवारों को होगा लाभ

आय सीमा में लगभग ढाई गुना वृद्धि के साथ, नई नीति से हजारों परिवारों को मेडिकल रीइंबर्समेंट का लाभ मिलने की उम्मीद है। इस कदम का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए स्वास्थ्य देखभाल सहायता को मजबूत करना है, साथ ही कल्याणकारी नीति को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बनाए रखना है।