हवाई यात्रा में राहत: DGCA ने टिकट रिफंड और कैंसिलेशन नियमों में बदलाव किया
नई दिल्ली में हवाई यात्रा के लिए नई नीति
नई दिल्ली: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना आई है। भारत के विमानन नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 24 फरवरी को संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स जारी किए हैं, जिसमें टिकट रिफंड और कैंसिलेशन से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं।
यह निर्णय 2025 में यात्रा में आई अव्यवस्थाओं और रिफंड में देरी की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर लिया गया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस को रिफंड के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए थे।
48 घंटे की विशेष 'लुक-इन' अवधि
नई नीति के अनुसार, जो यात्री एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट से टिकट बुक करेंगे, उन्हें 48 घंटे की विशेष 'लुक-इन' अवधि मिलेगी। इस समय के दौरान, वे बिना किसी अतिरिक्त सेवा शुल्क या कैंसिलेशन फीस के टिकट रद्द या यात्रा विवरण में बदलाव कर सकेंगे। हालांकि, यह सुविधा कुछ शर्तों के साथ लागू होगी और सभी बुकिंग पर स्वतः लागू नहीं होगी।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए नियम
घरेलू उड़ानों के लिए, टिकट निर्धारित प्रस्थान तिथि से कम से कम पांच दिन पहले बुक किया जाना चाहिए। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह अवधि 15 दिन पहले की बुकिंग पर लागू होगी। यदि यात्री इन शर्तों का पालन करते हैं, तो 48 घंटे के भीतर किए गए बदलाव पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
DGCA का स्पष्टीकरण
DGCA ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि टिकट में टाइपिंग की गलती होती है, तो एयरलाइन कोई शुल्क नहीं लेगी, बशर्ते त्रुटि की सूचना 24 घंटे के भीतर दी जाए और टिकट सीधे एयरलाइन के पोर्टल से खरीदा गया हो। इसके अलावा, यदि टिकट किसी ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल से लिया गया है, तो रिफंड की जिम्मेदारी एयरलाइन की होगी। सभी भुगतान 14 कार्य दिवसों के भीतर लौटाने होंगे।
मेडिकल इमरजेंसी में राहत
संशोधित नियमों में मेडिकल आपात स्थितियों को भी शामिल किया गया है। यदि कोई यात्री स्वास्थ्य संकट के कारण यात्रा नहीं कर पाता और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो एयरलाइन को पूरा रिफंड या भविष्य की यात्रा के लिए क्रेडिट शेल देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह कदम भारत को यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में लागू उपभोक्ता संरक्षण मानकों के करीब लाता है.