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हामिद अंसारी के बयान पर भाजपा का विरोध, सांप्रदायिकता पर उठाए सवाल

पूर्व उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में हिंदू सांप्रदायिकता को देश के लिए खतरा बताया, जिससे भाजपा में हलचल मच गई। अंसारी ने एजी नूरानी की किताब का हवाला देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू के विचारों को साझा किया। इस बयान पर भाजपा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और अंसारी के बयान का राजनीतिक महत्व।
 

हामिद अंसारी का विवादास्पद बयान


नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। एजी नूरानी की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में अंसारी ने कहा कि हिंदू सांप्रदायिकता देश के लिए एक बड़ा खतरा है। इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अंसारी को निशाने पर लिया।


अंसारी ने एजी नूरानी की पुस्तक 'द आरएसएस: अ मेनेस टू इंडिया' का उल्लेख करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक बयान का हवाला दिया। नेहरू ने कहा था कि भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में बोलते हुए अंसारी ने कहा कि नूरानी की किताब की प्रस्तावना में ऐसे विचार शामिल हैं, जो आज के कई मुसलमानों की भावनाओं को दर्शाते हैं।


अंसारी ने आगे बताया कि नूरानी ने नेहरू की टिप्पणियों का उल्लेख किया था, जो पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक में दर्ज की गई थीं। अंसारी के अनुसार, नेहरू ने उस बैठक में कहा था कि भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान भी हिंदू सांप्रदायिकता को लेकर काफी विवाद हुआ था।