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हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर: असम के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी यात्रा

हिमंत बिस्वा सरमा ने असम के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ली है। उनकी राजनीतिक यात्रा कॉटन कॉलेज से शुरू हुई, जहां उन्होंने छात्रसंघ चुनाव लड़ा। AASU से लेकर कांग्रेस में शामिल होने तक, सरमा ने कई उतार-चढ़ाव देखे। उन्होंने जालकुबारी सीट से लगातार पांच बार विधायक बनने के बाद बीजेपी में शामिल होकर मुख्यमंत्री बनने का सफर तय किया। जानें उनके जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ और राजनीतिक सफर के बारे में।
 

हिमंत बिस्वा सरमा ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली


हिमंत बिस्वा सरमा ने असम के मुख्यमंत्री के रूप में एक बार फिर शपथ ग्रहण किया है। एनडीए की लगातार तीसरी जीत के बाद, उन्हें दूसरी बार इस पद पर नियुक्त किया गया है। इस घटनाक्रम ने उनके राजनीतिक सफर पर चर्चा को जन्म दिया है, और लोग उनके बारे में अधिक जानने के लिए उत्सुक हैं। आइए, हम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की राजनीतिक यात्रा पर एक नजर डालते हैं।


कॉटन कॉलेज से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

सीएम सरमा की राजनीतिक यात्रा गुवहाटी के कॉटन कॉलेज से प्रारंभ हुई, जो ब्रिटिश काल में स्थापित हुआ था। इस कॉलेज ने अब तक राज्य को सात मुख्यमंत्री दिए हैं, और यहीं से हिमंत बिस्वा सरमा की यात्रा भी शुरू हुई।


AASU से राजनीतिक सफर की शुरुआत

हिमंत सरमा ने इसी कॉलेज के छात्रसंघ से अपने पहले चुनाव में भाग लिया। उन्होंने हॉस्टल से लेकर चाय की दुकानों तक प्रचार किया, जिससे उनका नाम पूरे कॉलेज में फैल गया। उनकी तेजतर्रार पर्सनालिटी और प्रभावशाली भाषणों ने उन्हें AASU का महासचिव बनने में मदद की।


अपने गुरु को हराकर आगे बढ़े

असम आंदोलन के दौरान, सैकिया ने एक युवा नेता की तलाश की, और हिमंत सरमा को कांग्रेस में शामिल किया गया। उन्होंने अपने गुरु भृगु फुकन के खिलाफ चुनाव लड़ा, हालांकि पहले प्रयास में हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का निर्णय लिया।


पांच बार विधायक बनने के बाद भी कुर्सी नहीं मिली

हिमंत सरमा ने 2001 से 2021 तक जालकुबारी सीट से लगातार पांच बार विधायक के रूप में कार्य किया। तरुण गोगोई के शासन में, उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई।


कांग्रेस से बीजेपी में बदलाव

2014 में, हिमंत ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने का निर्णय लिया। 2016 में असम में बीजेपी की सरकार बनने के बाद, उन्होंने 10 मई 2021 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। आज, उन्होंने फिर से इस पद की शपथ ली है।