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हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति: CAG रिपोर्ट से खुलासा

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर CAG की रिपोर्ट ने गंभीर चिंताओं को उजागर किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा से अधिक हो चुका है, और 86 प्रतिशत राजस्व वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर खर्च हो रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में इस रिपोर्ट को पेश किया, जिसमें राज्य की GDP में कमी और खर्च में वृद्धि के बारे में जानकारी दी गई है। CAG ने राज्य को सलाह दी है कि वह अपने राजस्व को बढ़ाने और खर्च को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए।
 

हिमाचल प्रदेश की वित्तीय चुनौतियाँ

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर अक्सर चिंताएँ उठती हैं। कर्मचारियों की वेतन में देरी की घटनाएँ भी सामने आई हैं। इस वर्ष, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए थे। अब भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट भी इन चिंताओं की पुष्टि कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की आय उसके खर्चों से कम है। हालांकि, यह समस्या देश के सभी 28 राज्यों में देखी जा रही है, लेकिन हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा से अधिक हो चुका है.


मुख्यमंत्री का रिपोर्ट पेश करना

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 3 सितंबर को विधानसभा में CAG की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में 2024-25 के दौरान राज्य की आय, व्यय, कर्ज और अन्य वित्तीय गतिविधियों का विवरण दिया गया है। CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान 0.70 प्रतिशत है, जो पिछले पांच वर्षों में घटा है। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में राज्य की GDP में थोड़ी वृद्धि हुई है.


राजस्व का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है

CAG की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य के राजस्व का 86 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर खर्च हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप विकास कार्यों और नई योजनाओं के लिए धन की कमी हो रही है। अब राज्य को केंद्र सरकार से सहायता मांगनी पड़ती है या कर्ज लेना पड़ता है.


राजकोषीय घाटे की स्थिति

फिस्कल रेस्पान्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (FRBM) अधिनियम 2003 के अनुसार, किसी राज्य का घाटा उसकी GSDP के 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपये है, जो कि राज्य की GSDP का 5.44 प्रतिशत है.


राजस्व की स्रोत

2024-25 में हिमाचल प्रदेश को कुल 40,872.35 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसमें राज्य के टैक्स से 12,772 करोड़ रुपये, केंद्र से टैक्स में हिस्सेदारी से 10,681.24 करोड़ रुपये, और अन्य स्रोतों से 13,721.61 करोड़ रुपये शामिल हैं.


खर्च में वृद्धि

CAG की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य में पेंशन, सब्सिडी और सैलरी पर खर्च में वृद्धि हुई है। 2020-21 में पेंशन पर खर्च 6,088.39 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 9,543.85 करोड़ रुपये हो गया है.


CAG की सलाह

CAG ने सुझाव दिया है कि हिमाचल प्रदेश को अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए और खर्च तथा कर्ज को कम करने की दिशा में काम करना चाहिए.