हिमाचल प्रदेश के बजट में ऐतिहासिक कटौती और नई योजनाओं की घोषणा
बजट में कटौती का ऐतिहासिक निर्णय
शिमला - हिमाचल प्रदेश ने अपने बजट में 3,586 करोड़ रुपए की कटौती की है, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ है। इस कटौती के बाद वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट 54,928 करोड़ रुपए रह गया है, जो पहले 58,514 करोड़ रुपए था।
मुख्यमंत्री का बजट भाषण
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने बजट भाषण में इस निर्णय को पिछली भाजपा सरकार द्वारा छोड़े गए बढ़ते कर्ज के बोझ से निपटने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि अब लोकलुभावन उपायों का समय समाप्त हो गया है और अनुत्पादक व्यय में कटौती करना जरूरी है।
आर्थिक संकट का सामना
उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों की मजबूती की सराहना करते हुए कहा कि वे वित्तीय संकट का साहसिकता से सामना करेंगे। यह पहली बार है कि 1952 के बाद केंद्र द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के बिना बजट पेश किया जा रहा है।
गरीबों के उत्थान की योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे गरीब लोगों की पहचान कर उनके उत्थान के लिए कार्य किया जाएगा। राज्य में 26.5 लाख बीपीएल परिवार हैं, और सरकार एक लाख सबसे गरीब परिवारों को सहायता प्रदान करेगी।
मुफ्त बिजली और वित्तीय सहायता
इन परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी, और लगभग 27,000 परिवारों को मकान बनाने में मदद की जाएगी। इसके अलावा, इन परिवारों की सभी महिलाओं को 1,500 रुपए दिए जाएंगे।
विपक्ष का विरोध
जब मुख्यमंत्री ने आरडीजी पर राज्य का समर्थन न करने वालों की आलोचना की, तो विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायक सदन में हंगामा करने लगे। 20 मिनट के हंगामे के बाद सीएम ने अपना भाषण जारी रखा।
धार्मिक पर्यटन का विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है, जहां कई प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थित हैं। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों को विश्व स्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
परियोजनाओं के लिए बजट
पहले चरण में बड़े मंदिरों के लिए विशेषज्ञों की मदद से परियोजनाएं तैयार की जाएंगी, जिन पर लगभग 500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मंदिरों में 65 करोड़ रुपए खर्च करने की भी घोषणा की गई है।