हिमाचल प्रदेश में जंगलों की आग से बढ़ी चिंता, वायु सेना ने लिया मोर्चा
जंगलों में आग का कहर
नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश इस समय अत्यधिक गर्मी और जंगलों में लगी आग से प्रभावित है। सोलन और कसौली के हरे-भरे जंगलों में लगी आग तेजी से रिहायशी क्षेत्रों और फलों के बागों की ओर बढ़ रही है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल वनस्पतियों को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व को भी खतरे में डाल दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है।
आग की लपटों का बढ़ता खतरा
कसौली की पहाड़ियों में भीषण गर्मी और सूखे मौसम के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया है। सूखी पत्तियों और तेज हवाओं ने आग को भड़काने में मदद की है। यह आग अब स्थानीय किसानों के फलों के बागों तक पहुँच गई है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है। घने जंगलों में लगी आग के कारण वन्यजीव अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे हैं।
वायु सेना की सक्रियता
जमीन पर तैनात दमकल कर्मियों के लिए दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। इस संकट को देखते हुए मंगलवार को भारतीय वायु सेना को इस अभियान में शामिल किया गया। वायु सेना ने तुरंत अपने दो अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर प्रभावित क्षेत्रों में भेजे। इन विमानों की मदद से उन ऊँचे और संकरे क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है, जहाँ पैदल पहुँचना संभव नहीं है।
सुखना झील से पानी की आपूर्ति
इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में वायु सेना के एमआई-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया जा रहा है। ये हेलीकॉप्टर चंडीगढ़ की सुखना झील से लगातार पानी भर रहे हैं। झील से पानी लाकर प्रभावित वन क्षेत्रों पर बौछार की जा रही है। इस हवाई रणनीति का मुख्य उद्देश्य आग की लपटों को आगे बढ़ने से रोकना और संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित करना है।
सोलन और कसौली में इस त्रासदी से निपटने के लिए प्रशासन पूरी ताकत लगा रहा है। जमीन पर मौजूद वन विभाग की टीमें और आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टर एक बेहतरीन तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। दोनों मोर्चों से किए जा रहे इस संयुक्त प्रयास का असर अब दिखने लगा है। अधिकारी आग को नए रिहायशी क्षेत्रों में फैलने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों और पर्यटकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं ताकि किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान को टाला जा सके। आने वाले कुछ घंटे इस अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हर प्रभावित क्षेत्र में मदद पहुँचाने की कोशिशें जारी हैं।