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हिमाचल प्रदेश में निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा, एक की मौत और सात घायल

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरने से एक साइट इंजीनियर की जान चली गई और सात लोग घायल हो गए। यह हादसा शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के तहत हुआ, जब पुल को लॉन्च किया जा रहा था। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। जानें इस घटना के बारे में और क्या जानकारी सामने आई है।
 

हिमाचल प्रदेश पुल हादसा


हिमाचल प्रदेश में पुल का हादसा: शुक्रवार को हमीरपुर जिले में एक गंभीर घटना घटी। शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के अंतर्गत बन रहे ट्रस ब्रिज का एक हिस्सा अचानक गिर गया। यह घटना मसियाना गांव के निकट हमीरपुर बाईपास पर हुई। इस हादसे में एक साइट इंजीनियर की जान चली गई, जबकि सात लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए हमीरपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेजा गया।


हादसा लॉन्चिंग के समय

यह घटना लगभग 90 मीटर लंबे ट्रस ब्रिज की लॉन्चिंग के दौरान हुई। पुल को आगे बढ़ाने के लिए पुशिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा था। जब लॉन्चिंग नोज को पियर कैप पर रखा जा रहा था, तभी तकनीकी खराबी आ गई। इसके परिणामस्वरूप ट्रस संरचना का एक हिस्सा गिर गया, जिससे कुछ श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और बचाव कार्य शुरू किया गया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बताया कि यह हादसा लॉन्चिंग प्रक्रिया के दौरान तकनीकी खराबी के कारण हुआ।


एक की मौत, सात घायल

इस हादसे में एक साइट इंजीनियर की मृत्यु हो गई। प्रशासन ने सात घायलों की जानकारी दी है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई गई है। घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद NHAI और निर्माण कार्य से जुड़ी टीमों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे और निर्माण सामग्री को हटाने का कार्य भी किया गया। हादसे के कारणों की जांच के लिए तकनीकी जांच की जा रही है। विशेषज्ञों की एक टीम लॉन्चिंग प्रक्रिया और मशीनरी की जांच करेगी।


शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना का हिस्सा

जिस पुल पर यह हादसा हुआ, वह शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना का एक हिस्सा है। इसका निर्माण हमीरपुर बाईपास पर NH-103 के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क संपर्क और यातायात व्यवस्था को सुधारना है। हादसे के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा और तकनीकी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही हादसे के सही कारणों का पता चलेगा।