☰
×

हिमाचल प्रदेश में नौवीं और दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 9 और 10 के पाठ्यक्रम में बदलाव की योजना बनाई है। नया पाठ्यक्रम एनसीईआरटी के मानकों के अनुरूप होगा, जिसमें रटने के बजाय विषयों की समझ और कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी कराना है। जानें इस बदलाव के बारे में और क्या-क्या नई किताबें और पाठ्यक्रम लागू होंगे।
 

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड का नया कदम


हिमाचल समाचार: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा नौ और दस के पाठ्यक्रम में बदलाव करने की योजना बनाई है। नया पाठ्यक्रम पूरी तरह से नए सिरे से तैयार किया जाएगा और नई पाठ्य-पुस्तकें भी प्रकाशित की जाएंगी। इसका उद्देश्य एनसीईआरटी के मानकों के अनुसार शिक्षा प्रदान करना है।


2027-28 सत्र में लागू होगा नया पाठ्यक्रम

विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर नए पाठ्यक्रम की योजना बनाई जाएगी। शिक्षा बोर्ड के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा नौ और दस के लिए नया पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं हो सका था। इसलिए, अब आगामी शैक्षणिक सत्र से बदलाव लागू करने की तैयारी की जा रही है। नए पाठ्यक्रम में रटने के बजाय विषयों की समझ, कौशल विकास और व्यावहारिक ज्ञान पर जोर दिया जाएगा।


चौथी से आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में पहले ही बदलाव

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने पहले ही चौथी से आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। अब, कक्षा नौ और दस को भी इस बदलाव में शामिल किया जा रहा है। बोर्ड का मानना है कि राज्य के पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे शैक्षणिक ढांचे के बीच अंतर होने से विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


बोर्ड ने बदलाव की तैयारी शुरू की

एचपीएसईबी के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि अगले वर्ष कक्षा नौ और दस का पाठ्यक्रम बदला जाएगा। इसमें एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा बोर्ड ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। नई किताबों और संशोधित पाठ्यक्रम के लागू होने से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।


कॉन्सेप्ट पर जोर देने की योजना

एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम के लागू होने से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलने की उम्मीद है। नए पाठ्यक्रम में पढ़ाई का अनावश्यक बोझ कम करने, अवधारणाओं को बेहतर तरीके से समझाने और व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। इस बदलाव के तहत विद्यार्थियों को केवल तथ्यों को याद करने के बजाय विषयों को समझने, उनका विश्लेषण करने और सीखी गई जानकारी का व्यावहारिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।