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हिमाचल प्रदेश में पेंशन घोटाला: मृतकों को मिल रही थी सामाजिक सुरक्षा

हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसमें हजारों मृतकों को पेंशन मिल रही थी। जांच में 42,867 लाभार्थियों में से 37,335 मृत पाए गए हैं। राज्य सरकार ने इस लापरवाही के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। वित्त सचिव ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए जांच प्रक्रिया को सख्त करने की बात कही है।
 

हिमाचल प्रदेश में पेंशन योजनाओं की गंभीर अनियमितता

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से संबंधित एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि राज्य में हजारों लोग, जो या तो अब जीवित नहीं हैं या पेंशन के लिए योग्य नहीं थे, वर्षों से पेंशन प्राप्त कर रहे थे। कुल 42,867 लाभार्थियों में से 37,335 लोग मृत पाए गए हैं, जबकि 5,532 लोग पेंशन की शर्तों को पूरा नहीं करते थे। इस गंभीर लापरवाही के उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है।


अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

इस मामले पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए वित्त, योजना, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाल ही में राज्य सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों की ई-केवाईसी मोबाइल एप के माध्यम से की गई थी। जब इस डेटा का अन्य सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किया गया, तब यह बड़ा खुलासा हुआ।


जांच में मिली गड़बड़ी

जांच के दौरान यह पाया गया कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों के नाम अभी भी पेंशन सूची में शामिल हैं, जबकि उनकी कई सालों पहले मृत्यु हो चुकी है या वे पेंशन लेने के योग्य नहीं हैं। निदेशक (आईटी) ने बैठक में बताया कि 2016 से अब तक सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पोर्टल से 4,52,779 मृत्यु के रिकॉर्ड प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 1,35,473 रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति का आधार नंबर दर्ज है।


सचिव वित्त के निर्देश

वित्त सचिव ने निर्देश दिया कि सभी आधार-सीडेड रिकॉर्ड का ई-केवाईसी आधारित पेंशन डाटाबेस से तुरंत मिलान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी लाभार्थी मृत पाए जाएंगे, उनका नाम बिना किसी देरी के पेंशन योजनाओं से हटा दिया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि सीआरएस डेटा का सत्यापन पूरा होने के बाद अब तक 2,378 लाभार्थियों को पेंशन योजनाओं से बाहर किया जा चुका है। ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य विभागों ने इस मामले में और जानकारी मांगी है, ताकि प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके।


लापरवाही की जांच

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल आंकड़ों को सुधारने तक सीमित नहीं रहेगा। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण मृत और अपात्र लोग लंबे समय तक पेंशन प्राप्त करते रहे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर उच्च स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों तक, सभी की भूमिका की जांच की जाएगी।


जांच प्रक्रिया को सख्त किया जाएगा

वित्त सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने स्पष्ट किया कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए, जो वास्तव में इसके हकदार हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए ई-केवाईसी और सीआरएस आधारित जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही या धोखाधड़ी की संभावना न रहे.