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हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर: 120 सड़कें बंद, 800 करोड़ का नुकसान

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। भूस्खलन के कारण 120 सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे यातायात में बाधा उत्पन्न हुई है। राज्य में अब तक 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें 14 लोगों की जान भी गई है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है। जानें इस स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी इस लेख में।
 

हिमाचल मौसम अपडेट


हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर जारी है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और बिजली-पानी की सप्लाई प्रभावित होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। राज्य में मानसून के दौरान अब तक लगभग 800 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। भूस्खलन और बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है। मौसम विभाग ने 11 अगस्त तक रेड अलर्ट जारी किया है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


120 सड़कें बंद, यातायात प्रभावित

बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश में अभी भी 120 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इन्हें खोलने का कार्य लगातार जारी है। कई स्थानों पर पहाड़ी दरकने और मलबा गिरने से लोगों को आवाजाही में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में किन्नौर जिले में शिमला-रिकांगपिओ नेशनल हाईवे पर निगुलसरी के पास पहाड़ी से चट्टानें और मलबा गिरने के कारण हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई थी। करीब 7 घंटे की मेहनत के बाद सड़क को फिर से सभी वाहनों के लिए खोल दिया गया। राहत की बात यह रही कि भूस्खलन के समय वहां से गुजर रहे वाहन सवार बाल-बाल बच गए।


आज भी कई जिलों में भारी बारिश

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, प्रदेश में मानसून की सक्रियता अभी भी बनी हुई है। 6 अगस्त से 12 अगस्त तक कई क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। शुक्रवार को बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने इस दौरान कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की संभावना भी जताई है। लोगों को नदी-नालों के पास जाने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है।


धर्मशाला में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज

पिछले 24 घंटों में हिमाचल के कई हिस्सों में जमकर बारिश हुई। सबसे अधिक बारिश धर्मशाला में 81.5 मिलीमीटर दर्ज की गई। इसके अलावा मनाली में 63 मिलीमीटर, नाहन में 41.2 मिलीमीटर, कसोल में 32 मिलीमीटर, शिमला में 30.6 मिलीमीटर और सराहन में 30 मिलीमीटर बारिश हुई। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट आई है। कल्पा में अधिकतम तापमान में 5.6 डिग्री, ऊना में 4.8 डिग्री और ताबो में 4.5 डिग्री की कमी देखी गई। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान सुंदरनगर में 31.1 डिग्री और मंडी में 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


सड़क, पानी और बिजली व्यवस्था चरमराई

मानसून के दौरान 30 जून से 6 अगस्त तक हुए नुकसान का कुल आकलन लगभग 800 करोड़ रुपये किया गया है। इसमें सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग (PWD) को हुआ है, जिसमें सड़क और पुलों को 592.30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पेयजल और सिंचाई योजनाओं को 186.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से 5.30 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बारिश और भूस्खलन के कारण कई क्षेत्रों में बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। विभागों की टीमें व्यवस्था को सामान्य करने में जुटी हुई हैं।


मकानों और पशुओं को भी हुआ नुकसान

मानसून की आपदा में कई परिवार प्रभावित हुए हैं। राज्य में 22 पक्के और 39 कच्चे मकान पूरी तरह तबाह हो गए हैं। वहीं, 90 पक्के और 142 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 183 गौशालाएं नष्ट हुई हैं और लगभग 194 पशुधन की हानि हुई है। कृषि और बागवानी क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है, जिसका प्रारंभिक आकलन लगभग 5.21 करोड़ रुपये किया गया है। मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन का कहना है कि बंद सड़कों को जल्द खोलने और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाएं बहाल करने का कार्य लगातार जारी है।