हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से बाढ़ का कहर, एनएच-5 बंद
हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर
शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ ही तबाही का सिलसिला शुरू हो गया है। जनजातीय जिला किन्नौर में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश के चलते अचानक बाढ़ आ गई, जिससे राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 (एनएच-5) पूरी तरह से बंद हो गया। लाहौल-स्पीति में भी जाहलमा नाले के उफान के कारण एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए बैकहो लोडर का सहारा लेना पड़ा।
चोलिंग क्षेत्र में आई बाढ़ ने भारी मात्रा में मलबा और कीचड़ लाकर एनएच-5 को अवरुद्ध कर दिया। सड़क पर चल रहे कई वाहन मलबे में फंस गए, लेकिन राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और सभी लोग सुरक्षित हैं।
जिला प्रशासन ने घटना की जानकारी मिलते ही त्वरित कार्रवाई की। उपायुक्त (डीसी) डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि चोलिंग के पास मलबा हटाने और फंसे वाहनों को निकालने के लिए भारी मशीनरी तैनात की गई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां राष्ट्रीय राजमार्ग को जल्द से जल्द यातायात के लिए बहाल करने में जुटी हैं।
लाहौल-स्पीति जिले में जाहलमा नाले में आई बाढ़ ने लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। नाले पर बना पुल पहले ही क्षतिग्रस्त था और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाई गई अस्थायी पुलिया भी तेज बहाव में बह गई। इससे उदयपुर उपमंडल और पांगी घाटी का संपर्क प्रभावित हुआ है।
उदयपुर उपमंडल के शेनुर गांव की शांति देवी को सीने में संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ होने पर कुल्लू रेफर किया गया। जब एंबुलेंस जाहलमा नाले के पास पहुंची, तो तेज बहाव के कारण आगे बढ़ना संभव नहीं था।
इस स्थिति में बीआरओ और पुलिस के जवानों ने साहस दिखाते हुए मरीज को स्ट्रेचर सहित बैकहो लोडर की मदद से उफनते नाले को पार कराया। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस के जरिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू भेजा गया, जहां उनकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।
बीआरओ ने गुरुवार सुबह नाले पर अस्थायी पुल बनाकर यातायात आंशिक रूप से बहाल कर दिया। उल्लेखनीय है कि मई में भूस्खलन के कारण जाहलमा पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद नए पुल का निर्माण कार्य जारी है। स्थानीय विधायक अनुराधा राणा ने उम्मीद जताई है कि इस महीने के अंत तक नया पुल तैयार हो जाएगा।