हिमाचल प्रदेश में लोन गारंटर बने कर्मचारियों के लिए मुश्किलें बढ़ीं
हिमाचल प्रदेश में लोन गारंटर बनने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें
शिमला, हिमाचल प्रदेश: राज्य में लोन गारंटर के रूप में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कठिनाइयाँ बढ़ने वाली हैं। सरकार ने इन कर्मचारियों से बकाया वसूली की योजना बनाई है, जिससे 30 शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी प्रभावित होंगे। अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। पत्र में उन शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की जानकारी दी गई है, जिन्होंने ऋण मामलों में गारंटर की भूमिका निभाई थी।
कर्मचारियों की सूची की मांग
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने सभी जिला उपनिदेशकों (प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा) और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित कर्मचारियों की सूची ड्रॉइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर को उपलब्ध कराएं।
विभाग की निगरानी
निदेशालय द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कार्रवाई की जानकारी संबंधित कार्यालयों और शिक्षा निदेशालय को भी भेजी जाए। विभाग इन मामलों की निगरानी स्वयं करेगा और लंबित मामलों में कार्रवाई करेगा।
ऋण योजना का प्रचार-प्रसार
निदेशालय के पत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग को दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से संचालित गृह ऋण योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस योजना के तहत 50 लाख रुपये तक का होम लोन रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध है। इसमें 50 हजार रुपये तक के ऋण पर 5%, 50 हजार से पांच लाख रुपये तक 6% और पांच लाख से 50 लाख रुपये तक 7% वार्षिक ब्याज निर्धारित किया गया है। लोन चुकाने के लिए अधिकतम 10 वर्ष की अवधि तय की गई है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाया भी जा सकता है।