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हिमाचल में मानसून का कहर: 200 सड़कों का बंद होना और 173 मौतें

हिमाचल प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर से तबाही मचाई है, जिससे 200 सड़कों का बंद होना और 173 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश को लगभग 936.63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मंडी और कुल्लू सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। जानें इस प्राकृतिक आपदा के कारण लोगों को किस प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
 

हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रभाव


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नुकसान का आंकड़ा एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 173 लोगों की जान जा चुकी है।


हिमाचल प्रदेश में मानसून का हाल (शिमला): हर साल की तरह, इस बार भी मानसून ने न केवल पहाड़ों को चुनौती दी है, बल्कि यहां के निवासियों और सरकारी ढांचे को भी प्रभावित किया है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के दौरान प्रदेश को 93,663.41 लाख रुपये, यानी लगभग 936.63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


लोगों की परेशानियों का कारण

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 200 सड़कों का बंद होना दर्ज किया गया। इसके साथ ही 45 वितरण ट्रांसफार्मर बाधित रहे और 39 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं। एक दिन पहले की तुलना में सड़कों की संख्या 209 से घटकर 200 हो गई, लेकिन बिजली और पानी की स्थिति में व्यवधान बना रहा।


मंडी और कुल्लू सबसे अधिक प्रभावित

सड़कों के बंद होने के मामले में मंडी जिला सबसे आगे रहा, जहां 64 सड़कों का बंद होना देखा गया। इसके बाद कुल्लू में 60, शिमला में 32 और चंबा में 24 सड़कों का बंद होना दर्ज किया गया। लाहौल-स्पीति में तीन, किन्नौर में दो और ऊना में चार सड़कों पर भी असर पड़ा। कुल्लू में बंजार उपमंडल की 19, कुल्लू की 23, आनी की आठ और निरमंड की 10 सड़कों का बंद होना देखा गया।


शिमला में स्थिति

राजधानी शिमला भी बारिश से अछूती नहीं रही। 13 अगस्त की सुबह तक जिले में 32 सड़कों का बंद होना दर्ज किया गया, जिसमें रामपुर क्षेत्र की 15, जुब्बल की 11, कोटखाई की दो और अन्य क्षेत्रों की सड़कें शामिल हैं। जिले में तीन डीटीआर बाधित रहे और 17 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं।