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हिमाचल से चंडीगढ़ तक चरस तस्करी का भंडाफोड़: तीन आरोपी दोषी ठहराए गए

हिमाचल प्रदेश से चंडीगढ़ के माध्यम से चरस तस्करी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की कार्रवाई के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराया है। इस मामले में जोगिंदर सिंह, अनिल कुमार और राज कुमार शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न सजा सुनाई गई है। एनसीबी ने नशे के नेटवर्क पर शिकंजा कसने की प्रक्रिया जारी रखने का आश्वासन दिया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और एनसीबी की अपील के बारे में।
 

चरस तस्करी का मामला उजागर


नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश से चंडीगढ़ होते हुए देश के प्रमुख शहरों में चरस पहुंचाने की योजना का खुलासा अदालत में हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट की कार्रवाई के लगभग आठ साल बाद, अदालत ने इस मामले में शामिल तीन व्यक्तियों को दोषी पाया है।


तलाशी के दौरान गिरफ्तारी

यह मामला 18 दिसंबर 2018 का है, जब एनसीबी की टीम ने हिमाचल प्रदेश-चंडीगढ़ सीमा पर खुड़ा लाहौरा पुल के निकट एक हुंडई वरना कार को रोका और उसकी तलाशी ली। इस दौरान 16.5 किलो चरस बरामद की गई। मौके पर कुल्लू के जोगिंदर सिंह और मंडी के अनिल कुमार को गिरफ्तार किया गया।


अतिरिक्त चरस की बरामदगी

जांच के दौरान कुल्लू के राज कुमार उर्फ राजू का नाम भी सामने आया। एनसीबी के अनुसार, वह अन्य आरोपियों के साथ मिलकर चरस की सप्लाई मुंबई, गोवा, बेंगलुरु और चेन्नई तक करने वाले नेटवर्क से जुड़ा था। बरामद चरस की खेप मुंबई भेजी जानी थी। राज कुमार को 20 दिसंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया, और उसके घर से 80 ग्राम अतिरिक्त चरस भी मिली।


विशेष अदालत में मामला दर्ज

एनसीबी ने 12 जून 2019 को तीनों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत विशेष अदालत में शिकायत दर्ज की। हाल ही में, 15 सितंबर 2026 को विशेष न्यायाधीश ने तीनों को दोषी ठहराया।


जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार को 12-12 साल की कठोर सजा और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना, जबकि राज कुमार उर्फ राजू को एक साल की कठोर सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया।


एनसीबी की कार्रवाई जारी

एनसीबी ने कहा: नशे के नेटवर्क पर नियंत्रण पाने के लिए जांच और अभियोजन की प्रक्रिया जारी रहेगी। आम जनता से मादक पदार्थों की तस्करी की सूचना देने की अपील की गई है, जिसके लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1933 पर संपर्क किया जा सकता है। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।