हिमालयी बाढ़: केदारनाथ और नेपाल की आपदाओं का विश्लेषण
हिमालयी बाढ़ का खतरा
हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ को केवल वर्षा से जोड़ना उचित नहीं है। ग्लेशियर झीलों का टूटना, बर्फ और चट्टानों का खिसकना, और भूस्खलन भी विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकते हैं।
नेपाल में हालिया बाढ़
26 अगस्त 2026 को नेपाल के रसुवा जिले में आई अचानक बाढ़ ने एक बार फिर इस खतरे को उजागर किया, जो 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ त्रासदी के 13 साल बाद हुई।
केदारनाथ आपदा का कारण
जून 2013 में उत्तराखंड में लगातार बारिश हुई, विशेषकर 15 से 17 जून के बीच। इस दौरान बर्फ पिघलने से जलस्तर बढ़ा और चोराबारी झील का नैचुरल बांध टूट गया, जिससे बाढ़ आई।
केदारनाथ में नुकसान
केदारनाथ की आपदा का प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में भारी बारिश के कारण लगभग 4,200 गांव और 9 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। लगभग 3,320 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए। नेपाल में भोटेकोशी नदी के क्षेत्र में आई बाढ़ ने भी कई क्षेत्रों को प्रभावित किया, जिससे सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुईं।
नेपाल में बाढ़ के कारण
नेपाल की बाढ़ को सामान्य बारिश से नहीं जोड़ा जा सकता। प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच में ऊंचाई वाले क्षेत्र से बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के अचानक टूटने की बात सामने आई है। यह हिस्सा लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई से गिरा और 22 किलोमीटर की दूरी को कुछ ही मिनटों में तय किया।
आपदाओं में अंतर
2013 में भारी बारिश, बर्फ पिघलने और चोराबारी झील के टूटने से मंदाकिनी नदी में पानी और मलबा पहुंचा। वहीं, नेपाल में बर्फ और चट्टान के अचानक टूटने से नदी का बहाव प्रभावित हुआ। दोनों घटनाओं में पानी और मलबा तबाही का मुख्य कारण बने, लेकिन उनके आरंभिक कारण भिन्न थे।