34 साल बाद बिहार में बुजुर्ग को मिली सजा, अदालत ने सुनाया फैसला
बिहार में 34 साल पुराना मामला, अदालत का फैसला
वैशाली जिले के जुनवरनपुर थाने में 1992 में दर्ज एक मामले में मंगलवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया। इस मामले में 34 साल बाद 5 व्यक्तियों को सजा दी गई है, जिनमें एक 84 वर्षीय बुजुर्ग भी शामिल हैं। एडीजे-1 मनोज कुमार तिवारी ने दीपा राय को तीन साल की सजा सुनाई, जबकि अन्य चार दोषियों को 10-10 साल की सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
अदालत का फैसला 34 साल बाद
लोक अभियोजक श्याम बाबू राय ने बताया कि यह मामला 1992 का है। जुरवनपुर थाना क्षेत्र में अदालत राय अपनी पत्नी के साथ बैठे थे, तभी उन्हें पता चला कि उनके घर जाने वाले रास्ते पर कुछ लोग शीशे के टुकड़े बिछा रहे हैं। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर गोली चला दी, जिससे वह घायल हो गए। मामले की जांच के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई।
ट्रायल के दौरान चार आरोपियों की मृत्यु
उन्होंने बताया कि इस मामले में कुल 9 लोग आरोपी थे, जिनमें से चार की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई। बाकी पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। अभियुक्तों ने मुकदमे को लंबा खींचने का प्रयास किया, लेकिन अपर लोक अभियोजक ख्वाजा हसन ने प्रभावी पैरवी की। सभी गवाहों के बयान दर्ज किए गए और सभी आवश्यक दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
सभी आरोपी दोषी पाए गए
कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। 26 मई को सजा सुनाने की प्रक्रिया के बाद, अदालत ने मंगलवार को अपना निर्णय सुनाया। 84 वर्षीय दीपा राय पहले से ही जमानत पर थे। उनकी उम्र को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाते हुए प्रोबेशन का लाभ दिया, जिससे उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। अन्य चार दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई।
लोक अभियोजक ने कहा कि 34 साल बाद आए इस फैसले ने समाज और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराधियों को सजा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पहले से जमानत पर है और उसे तीन साल या उससे कम की सजा होती है, तो उसे प्रोबेशन या जमानत का लाभ दिया जा सकता है।