43 वर्षों की यात्रा: ‘उत्तम हिन्दू’ की संघर्ष गाथा
एक कठिन यात्रा की शुरुआत
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण यात्राओं में से एक माना जाता है। लेकिन यदि किसी यात्रा की तुलना इससे की जा सकती है, तो वह है एक समाचार पत्र का संचालन। जब एक पर्वतारोही एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू करता है, तो उसे यह नहीं पता होता कि वह शिखर तक पहुँचेगा या नहीं। हर कदम अनिश्चितता से भरा होता है, और हर मोड़ एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है। पर्वत केवल शारीरिक शक्ति की परीक्षा नहीं लेता, बल्कि साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प की भी। कई लोग इस यात्रा की शुरुआत बड़े सपनों के साथ करते हैं, लेकिन मंजिल तक पहुँचने वाले बहुत कम होते हैं। अधिकांश लोग परिस्थितियों के आगे झुककर लौट जाते हैं।
एक साहसी निर्णय
43 वर्ष पहले, 1983 में, जब पंजाब आतंकवाद के संकट से जूझ रहा था, तब 31 वर्षीय इरविन खन्ना ने अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने ‘उत्तम हिन्दू’ नामक एक समाचार पत्र शुरू करने का साहसिक कदम उठाया। उस समय उनके पास एक स्थापित व्यवसाय था, एक युवा पत्नी और दो छोटे बेटे थे। उन्होंने पत्रकारिता के अनिश्चित क्षेत्र में कदम रखा, केवल अपनी पहचान को बचाने के लिए। उनका मानना था कि समाचार पत्र केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ और जिम्मेदारी होती है।
पत्रकारिता की शुरुआत
बिना किसी औपचारिक अनुभव के, उन्होंने ‘उत्तम हिन्दू’ की शुरुआत एक मासिक पत्रिका के रूप में की। उस समय कई स्थापित मीडिया व्यक्तियों ने उनकी पहल को गंभीरता से नहीं लिया और कुछ ने इसका मजाक उड़ाया। लेकिन इरविन खन्ना ने पत्रकारिता को समर्पित कर दिया। समय के साथ, उन्होंने इतिहास और अध्यात्म से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन किया और विभिन्न समाचार पत्रों के सम्पादकीय का गहन अध्ययन किया। ‘उत्तम हिन्दू’ मासिक से पाक्षिक और फिर साप्ताहिक समाचार पत्र में परिवर्तित हो गया।
नए अध्याय की शुरुआत
1989 में, उन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया और ‘उत्तम हिन्दू’ को एक सायंकालीन दैनिक समाचार पत्र में परिवर्तित किया। अब चुनौतियाँ कई गुना बढ़ गई थीं। लेकिन पाठकों का स्नेह लगातार बढ़ता गया। 1989 से 1991 के बीच, ‘उत्तम हिन्दू’ ने पंजाब के प्रमुख शहरों में अपनी पहचान बना ली। पाठकों के विश्वास ने इरविन खन्ना को जीवन का सबसे बड़ा निर्णय लेने का साहस दिया।
सफलता और चुनौतियाँ
1 अगस्त 1991 को ‘उत्तम हिन्दू’ के प्रात:कालीन संस्करण की शुरुआत के साथ संघर्ष का एक नया अध्याय शुरू हुआ। खर्चा बढ़ गया था और नई चुनौतियाँ सामने थीं। लेकिन पाठकों का समर्थन भी बढ़ता गया। पंजाब से बाहर निकलकर, ‘उत्तम हिन्दू’ हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक पहुँच गया। हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा परिणाम प्रकाशित करने के लिए ‘उत्तम हिन्दू’ का चयन किया, जिससे प्रसार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
संघर्ष का समय
जब ‘उत्तम हिन्दू’ का प्रसार स्थापित समाचार पत्रों के करीब पहुँचने लगा, तब हमें प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। 1996 से 1998 के बीच का समय हमारी यात्रा का सबसे कठिन अध्याय बन गया। रंगीन समाचार पत्र फिर से श्वेत-श्याम हो गया और पृष्ठों की संख्या घटकर चार रह गई। बड़े राष्ट्रीय मीडिया समूहों के आने से विज्ञापनदाता और कर्मचारी दूसरी संस्थाओं की ओर जाने लगे।
परिवार का संकल्प
इस कठिन समय में, इरविन खन्ना के बेटे पुनीत और मैं उनके साथ खड़े हो गए। जो सपना एक व्यक्ति ने देखा था, वह पूरे परिवार का संकल्प बन गया। धीरे-धीरे परिस्थितियाँ बदलने लगीं। विज्ञापन वापस आने लगे और प्रसार बढ़ने लगा। हर उपलब्धि ने हमें यह सिखाया कि धैर्य और संघर्ष का कोई विकल्प नहीं होता।
विकास का नया अध्याय
2006 में, ‘उत्तम हिन्दू’ ने अपनी पहली रंगीन प्रिंटिंग मशीन स्थापित की और ई-पेपर की शुरुआत की। 2012 में दिल्ली संस्करण का शुभारंभ हुआ और 2016 में ‘उत्तम हिन्दू’ न्यूज़ पोर्टल शुरू किया गया। 2020 में उत्तम हिन्दू टीवी की शुरुआत के साथ हमने वीडियो पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा। 2022 में हमने अपने आधुनिक कॉर्पोरेट कार्यालय की स्थापना की।
आज का ‘उत्तम हिन्दू’
आज ‘उत्तम हिन्दू’ समूह के तीन संस्करण देश के नौ राज्यों में पहुँच रहे हैं। डिजिटल माध्यम पर हमारे पाँच लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं और प्रतिदिन लगभग दस लाख लोग हमारे समाचारों से जुड़ते हैं। इस यात्रा को पीछे मुड़कर देखते हैं तो संतोष होता है, लेकिन गर्व इस बात पर है कि बहुत कम समाचार पत्रों ने इस तरह की यात्रा की है।
भविष्य की ओर
इस संघर्ष ने हमें सिखाया है कि समाचार पत्र की यात्रा कभी भी आसान नहीं होती। जब कोई समाचार पत्र खुद को अजेय समझने लगता है, तब ईश्वर उसे विनम्र होना सिखा देता है। हर संकट ने हमें मजबूत बनाया है। हम अपने पाठकों, विज्ञापनदाताओं, कर्मचारियों और आलोचकों के प्रति आभारी हैं। 43 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पहाड़ अभी भी सामने खड़ा है। हमें विश्वास है कि उत्तम हिन्दू की यात्रा गरिमा, सत्य और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ती रहेगी।
लेखक का परिचय
–रितिन खन्ना
(लेखक उत्तम हिन्दू समूह के कार्यकारी संपादक हैं )