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8वीं कक्षा के छात्रों के लिए ज्यूडिशियरी में करप्शन पर नया पाठ

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने 8वीं कक्षा की नई सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक नया अध्याय जोड़ा है। इस अध्याय में छात्रों को न्यायालय की संरचना, लंबित मामलों की संख्या, और ज्यूडिशियरी में करप्शन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। यह पहल छात्रों को न्याय प्रणाली की चुनौतियों और पारदर्शिता के महत्व को समझने में मदद करेगी।
 

एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में करप्शन का अध्याय


नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने 8वीं कक्षा की नई सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक नया अध्याय जोड़ा है। यह पहली बार है जब छात्र इस विषय पर जानकारी प्राप्त करेंगे।


इस अध्याय में सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट में 62 लाख 40 हजार और डिस्ट्रिक्ट व सबऑर्डिनेट कोर्ट में 4 करोड़ 70 लाख लंबित मामलों की संख्या का उल्लेख किया गया है। इस नए अध्याय का शीर्षक 'हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका' है। इसमें न्यायालय की संरचना और न्याय तक पहुंच के साथ-साथ ज्यूडिशियल सिस्टम की चुनौतियों, जैसे करप्शन और केस बैकलॉग पर भी चर्चा की गई है।


ज्यूडिशियरी से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु


  • करप्शन के अध्याय में बताया गया है कि जजों को एक कोड ऑफ कंडक्ट का पालन करना होता है, जो उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया भी बताई गई है।

  • पुस्तक के अनुसार, CPGRAMS सिस्टम के तहत 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसमें गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियमों का भी उल्लेख है, जिसमें संसद द्वारा इम्पीचमेंट मोशन पास करके जज को हटाने की प्रक्रिया शामिल है।

  • छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है, और जज को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है। अध्याय में यह भी उल्लेख है कि लोग ज्यूडिशियरी के विभिन्न स्तरों पर करप्शन का सामना करते हैं, जिससे गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

  • राज्य और केंद्र सरकारें ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं, जिसमें तकनीक का उपयोग और करप्शन के मामलों में त्वरित कार्रवाई शामिल है।


पूर्व सीजेआई बीआर गवई का उल्लेख

पुस्तक में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी में करप्शन और गलत कामों का पब्लिक ट्रस्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस ट्रस्ट को पुनः स्थापित करने का मार्ग इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए त्वरित, निर्णायक और पारदर्शी कदमों में है। ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी लोकतांत्रिक गुण हैं।