NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में NTA की विशेषज्ञ की गिरफ्तारी
NEET-UG 2026 पेपर लीक का सनसनीखेज खुलासा
नई दिल्ली: देशभर में हड़कंप मचाने वाले नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस फर्जीवाड़े की मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नियुक्त बॉटनी की सीनियर टीचर मनीषा मंधारे हैं। जांच एजेंसी ने मनीषा को गिरफ्तार कर लिया है, और इस गिरफ्तारी के बाद कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
रक्षक ही भक्षक: NTA की विशेषज्ञ ने किया बड़ा खेल
सीबीआई की जांच में यह सामने आया है कि एनटीए ने मनीषा मंधारे को नीट-यूजी 2026 परीक्षा प्रक्रिया में एक विषय विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया था। इस जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हुए, मनीषा ने पुणे की एक अन्य महिला मनीषा वाघमारे के माध्यम से कई अमीर नीट अभ्यर्थियों से संपर्क किया और पेपर लीक की साजिश को अंजाम दिया। पुलिस ने वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया था।
स्पेशल कोचिंग क्लास के जरिए असली सवालों का वितरण
इस रैकेट का संचालन बेहद चालाकी से किया गया। मनीषा मंधारे ने अपने पुणे स्थित घर पर चुनिंदा छात्रों के लिए एक 'स्पेशल कोचिंग क्लास' का आयोजन किया। इन कक्षाओं में उसने छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के संभावित सवाल बताए और उन्हें अपनी कॉपियों में लिखवाने के लिए कहा। जब 3 मई 2026 को असली नीट-यूजी परीक्षा हुई, तो पेपर में वही सवाल पाए गए। यह सब मनीषा वाघमारे की मदद से हुआ, जिसका काम पैसे वाले छात्रों को इन कक्षाओं में लाना था।
सीबीआई की छापेमारी और गिरफ्तारियां
शिक्षा मंत्रालय की शिकायत के बाद 12 मई को केस दर्ज होते ही सीबीआई ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की। पिछले 24 घंटों में देश के 6 स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इस नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 5 आरोपियों को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
केमिस्ट्री और बायोलॉजी के बिचौलियों की पहचान
जांच एजेंसियों ने केमिस्ट्री और बायोलॉजी पेपर लीक के असली स्रोत और बिचौलियों की पहचान कर ली है। खुलासों के अनुसार, केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी और बॉटनी टीचर मनीषा, दोनों ही एनटीए के विशेषज्ञ थे और पेपर लीक के लिए मनीषा वाघमारे का सहारा लिया था। वाघमारे के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं और वह इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी सबूतों की गहन जांच जारी है और जल्द ही एक और बड़ी गिरफ्तारी हो सकती है।