PM किसान योजना: किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिन, 7 साल पूरे
रोहतक में पीएम किसान योजना का जश्न
रोहतक, पीएम किसान योजना: हरियाणा के यमुनानगर, रोहतक और हिसार के किसानों के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है। केंद्र सरकार की प्रमुख आर्थिक सहायता योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, आज अपने 7 साल पूरे कर चुकी है। इस योजना की शुरुआत मोदी सरकार द्वारा 24 फरवरी 2019 को की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें खेती के लिए नकद सहायता प्रदान करना है। इस अवसर पर किसान सम्मान निधि के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी जानकारी साझा की गई है।
किसानों के खाते में सीधे पहुंचते हैं 6 हजार रुपये
किसानों को मिलती है सालाना 6 हजार रुपये की सहायता
पीएम किसान योजना के अंतर्गत, प्रत्येक वर्ष किसानों को कुल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि साल में तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है, जिसमें हर किस्त में 2 हजार रुपये शामिल होते हैं।
सरकार यह धनराशि सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और किसानों को अपने पैसे के लिए बैंकों की लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ता। इस सहायता से किसान अपनी फसल की लागत, बीज और खाद के खर्च को आसानी से पूरा कर लेते हैं।
होली से पहले 22वीं किस्त का इंतजार
किसानों की नजर अगली किस्त पर
पिछले वर्ष 19 नवंबर को सरकार ने इस योजना की 21वीं किस्त जारी की थी। इसके बाद से किसानों की निगाहें अगली किस्त पर टिकी हुई हैं। हालांकि, सरकार ने 22वीं किस्त जारी करने की कोई आधिकारिक तारीख अभी तक नहीं बताई है।
फिर भी, यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार होली के त्योहार से पहले किसानों के खातों में 2-2 हजार रुपये ट्रांसफर कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह त्योहारी सीजन में किसानों के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत साबित होगा, जिससे उन्हें अगली फसल की तैयारी और घरेलू खर्चों में मदद मिलेगी।
लाखों किसानों का सहारा
आर्थिक स्थिति में सुधार
पिछले सात वर्षों में, पीएम किसान योजना ने छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को काफी मजबूत किया है। यह योजना न केवल उनकी आय में वृद्धि करती है, बल्कि उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं के प्रति भी जागरूक करती है।
किसानों का कहना है कि समय पर मिलने वाली इस आर्थिक सहायता से उनकी खेती से जुड़ी कई आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं। इस योजना ने खेती को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब देशभर के करोड़ों किसान अपनी 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं।