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PM मोदी ने सऊदी प्रिंस से पश्चिम एशिया संकट पर की चर्चा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पीएम नरेंद्र मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर सहमति जताई और ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों की निंदा की। इस बीच, पाकिस्तान में तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक हो रही है, जिसमें मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की जाएगी। ईरान ने भी इजरायल और कुवैत पर हमले जारी रखे हैं।
 

दोनों नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर जताई सहमति


PM मोदी ने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की निंदा की


नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष को आज 30 दिन पूरे हो गए हैं। इस एक महीने में, ईरान ने इन दोनों देशों के हमलों का साहसपूर्वक जवाब दिया है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी देखा जा रहा है, और सभी प्रमुख देश इस युद्ध को समाप्त करने की इच्छा रखते हैं।


इस बीच, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित रखना आवश्यक है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो।


पाकिस्तान में महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन

आज तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्री पाकिस्तान पहुंचेंगे। वे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात करेंगे। इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह युद्ध के बाद की पहली बड़ी बैठक है जिसमें कई देशों के विदेश मंत्री शामिल होंगे।


ईरान के हमले जारी

ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान से मिसाइलें दागे जाने के बाद, दक्षिणी इजराइल के डिमोना और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सायरन बजने लगे हैं। इसके साथ ही, कुवैत और बहरीन में भी सायरन की आवाजें सुनाई दे रही हैं।


ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए

ईरान की एक न्यूज एजेंसी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने पश्चिमी ईरान के खुजेस्तान प्रांत के हफ्तेगल शहर में पानी के एक बड़े स्रोत को निशाना बनाया है। ईरान पिछले कई वर्षों से पानी की कमी के संकट का सामना कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल इस संकट का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।


उनके हमले ऐसे हो सकते हैं जिनसे लाखों ईरानी नागरिक साफ पानी से वंचित हो सकते हैं। खाड़ी देशों द्वारा संचालित 400 से अधिक डिसेलिनेशन प्लांट फारस की खाड़ी के तट पर स्थित हैं, जो दुनिया के 40% डिसेलिनेटेड पानी का उत्पादन करते हैं।