अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान का प्रतिबंध: एक गंभीर स्थिति
तालिबान का शिक्षा पर प्रतिबंध
(गजाल हबीबयार, ओटावा विश्वविद्यालय) ओटावा, 15 अगस्त - तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता में लौटने के तुरंत बाद लड़कियों को कक्षा छह से आगे की पढ़ाई करने से रोक दिया था। यह प्रतिबंध अब तक जारी है। अफगानिस्तान एकमात्र ऐसा देश है, जहां लड़कियों और महिलाओं को औपचारिक माध्यमिक और उच्च शिक्षा प्राप्त करने से रोका गया है।
महिलाओं पर कार्य प्रतिबंध
इसके बाद के वर्षों में, अफगान महिलाओं को उन क्षेत्रों में काम करने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया, जहां वे पहले कार्यरत थीं। लगभग 22 लाख किशोरियों को 1,800 दिनों से अधिक समय से माध्यमिक विद्यालय जाने से रोका गया है। यूनिसेफ के 2026 के विश्लेषण के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण 2030 तक अफगानिस्तान में 20,000 महिला शिक्षकों और 5,400 स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है।
आर्थिक नुकसान
इन पाबंदियों के कारण देश को हर साल लगभग 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है। सितंबर 2025 से तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों समेत अफगान महिलाओं को संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों में प्रवेश करने से भी रोक दिया है। जनवरी 2026 में महिला सरकारी कर्मचारियों को घर पर रहने के लिए मिलने वाला कम वेतन भी बंद कर दिया गया।
अफगान महिलाओं का संघर्ष
मैंने ऐसा पहले भी देखा था। 1996 में, जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था, तब मैं छोटी थी। इस बार जो बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है, वह यह है कि दुनिया की विफलता जागरूकता की कमी के कारण नहीं है। सभी को पता है कि अफगान लड़कियों के साथ क्या हो रहा है, लेकिन तालिबान को इसकी कोई वास्तविक कीमत नहीं चुकानी पड़ी है।
विरोध प्रदर्शन
तालिबान के सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद, अफगान महिलाएं काबुल की सड़कों पर “रोटी, काम, आजादी” के नारे लगाते हुए उतरी थीं। तब से वे लगातार यही मांग कर रही हैं, लेकिन उन्हें गिरफ्तारियों और यातनाओं का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2026 में भी काबुल की लड़कियों ने शिक्षा के अधिकार की मांग की थी।
गुप्त शिक्षा प्रणाली
जहां विरोध प्रदर्शन करना खतरनाक हो गया है, वहां अफगान महिलाओं ने एक शांत तरीका अपनाया है: उन्होंने घरों से संचालित भूमिगत स्कूलों का अनौपचारिक नेटवर्क बनाया है। तालिबान के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क का मुख्य माध्यम संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में चल रही दोहा प्रक्रिया है।
अंतरराष्ट्रीय वार्ताएं
2023 से तालिबान के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, जिनका उद्देश्य अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में फिर से शामिल करना है। तालिबान के आग्रह पर महिलाओं और अफगान नागरिक समाज के समूहों को मुख्य वार्ताओं से बाहर रखा गया है।
व्यक्तिगत अनुभव
1996 में, जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया, तब मेरी अंतिम परीक्षाएं होने में कुछ ही सप्ताह बाकी थे। उस रात बिजली नहीं थी, और हमें रेडियो पर सुना कि लड़कियों के लिए स्कूल अगली सूचना तक बंद कर दिए गए हैं। शुरुआत में, मैं समझ नहीं पाई कि इसका क्या मतलब था।
भविष्य की अनिश्चितता
मेरे माता-पिता ने हमें पाकिस्तान ले जाकर हमारी पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय कई अफगान परिवारों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं था। मेरी कुछ सहेलियां स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं और उनकी शादी कर दी गई। आगे चलकर, मैं अफगान सरकार में खान एवं पेट्रोलियम मंत्रालय की निदेशक बनी।
आगे का रास्ता
मेरी पीढ़ी के लिए परिस्थितियां बदल गई थीं, लेकिन इस पीढ़ी के लिए भी बदलाव की कोई गारंटी नहीं है। अफगान महिलाएं पिछले पांच वर्षों से लगातार विरोध और संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि बाकी दुनिया ने तालिबान के इस प्रतिबंध के खिलाफ इतना कम प्रयास क्यों किया है।