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अमृतसर में रसोखाना राजा साहिब नाभा कलां में 169 पावन स्वरूपों की जांच

अमृतसर के रसोखाना राजा साहिब नाभा कलां में 169 पावन स्वरूपों की जांच की गई है। इस जांच में 30 स्वरूप पहले से संबंधित गुरुद्वारों को दिए गए थे, जबकि 139 स्वरूपों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। SIT अधिकारियों ने मामले की गहन जांच जारी रखी है। जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
 

जांच का विवरण

अमृतसर: थाना सी डिवीजन में दर्ज मुकदमा संख्या 168 (17 दिसंबर 2025) के तहत स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बुधवार को बंगा के निकट गांव मजारा नौ आबाद में रसोखाना राजा साहिब नाभा कलां में जांच की। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 295, 295-ए, 409, 465 और 120-बी के अंतर्गत दर्ज किया गया है।


जांच प्रक्रिया

SIT की टीम ने मौके पर पहुंचकर पावन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों की धार्मिक मर्यादा के अनुसार जांच की। इस दौरान प्रबंधक कमेटी के सदस्यों और ग्रंथी सिंहों की उपस्थिति में पहले अरदास की गई, इसके बाद पावन स्वरूपों की गिनती और जांच की गई।


पावन स्वरूपों की संख्या

जांच में यह पाया गया कि रसोखाना परिसर में कुल 169 पावन स्वरूप मौजूद हैं। इनमें से 30 पावन स्वरूप पहले एसजीपीसी द्वारा संबंधित गुरुद्वारों को उपलब्ध कराए गए थे। इनमें 10 पावन स्वरूप गुरुद्वारा साहिब पातशाही सातवीं, गांव दुसांझ खुर्द (जिला एस.बी.एस. नगर) और 20 पावन स्वरूप गुरुद्वारा साहिब गांव मजारा नौ आबाद के नाम पर जारी किए गए थे।


रिकॉर्ड की कमी

जांच में यह भी सामने आया कि ये पावन स्वरूप संबंधित गुरुद्वारों में स्थापित होने के बजाय रसोखाना राजा साहिब नाभा कलां में रखे हुए थे। वहीं, शेष 139 पावन स्वरूपों के संबंध में रसोखाना राजा साहिब नाभा कलां की प्रबंधक कमेटी के पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं पाया गया। इस मामले में प्रबंधक कमेटी के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। SIT अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहन जांच जारी है और सभी तथ्यों की विस्तृत पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।