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अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते की दिशा में वार्ता

अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी अब एक ऐतिहासिक शांति समझौते की ओर बढ़ रही है। ज्यूरिख में चल रही उच्चस्तरीय वार्ता में ईरान के राष्ट्रपति ने महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं, जिसमें कतर में फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर की वापसी का आश्वासन शामिल है। इस वार्ता में इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की चिंता भी सामने आई है। जानें इस समझौते के प्रमुख पहलुओं और पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका के बारे में।
 

ज्यूरिख में अमेरिका-ईरान वार्ता

ज्यूरिख: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी अब एक महत्वपूर्ण शांति समझौते की ओर बढ़ रही है। स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता चल रही है, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करना है। इस वार्ता के दौरान, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की हैं। उन्होंने बताया कि कतर में फ्रीज किए गए ईरान के 6 अरब डॉलर इस समझौते के तहत वापस मिलेंगे। पेजेश्कियान ने यह भी कहा कि समझौते की सभी शर्तें उनके पक्ष में हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन मांगों को मान लिया है, जिन पर पहले प्रतिबंध लगाए गए थे।


नेतन्याहू पर सीधा हमला

‘इस डील से सबसे ज्यादा दुखी होंगे नेतन्याहू’

ईरानी राष्ट्रपति ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर सीधा हमला करते हुए कहा कि ज्यूरिख में हो रही वार्ता से सबसे अधिक चिंता नेतन्याहू को होगी। परमाणु हथियारों के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि अमेरिका की एकमात्र शर्त थी कि ईरान परमाणु बम नहीं बनाएगा। पेजेश्कियान ने कहा कि उनके शहीद नेता भी यही चाहते थे कि ईरान परमाणु बम न बनाए और अमेरिका के लिखित आश्वासन पर ईरान ने बिना किसी हिचकिचाहट के हस्ताक्षर कर दिए हैं।


महाबैठक में प्रमुख नेता शामिल

ज्यूरिख में दिग्गजों का जमावड़ा, पाकिस्तान बना मध्यस्थ

इस महत्वपूर्ण बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जैसे कई शीर्ष नेता शामिल हैं। अमेरिका की ओर से ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर भी वार्ता का हिस्सा हैं। इस समझौते में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ और गारंटर की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस्लामाबाद इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए अपनी भूमिका निभाता रहेगा।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर मंडराया संकट

पिछले सप्ताह ट्रंप और पेजेश्कियान ने पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया के एक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोला गया था। हालांकि, इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में अचानक भड़की नई झड़पों के कारण वार्ता के तकनीकी चरण में देरी हुई है। ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने इजरायली हमलों के कारण होर्मुज को एहतियातन फिर से बंद कर दिया है।