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अमेरिका के नए वीजा नियम: 20,000 डॉलर की सिक्योरिटी राशि अनिवार्य

अमेरिकी सरकार ने नए वीजा नियमों के तहत 20,000 डॉलर की सुरक्षा राशि अनिवार्य कर दी है, जो विदेश यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव है। यह नियम 3 अगस्त से लागू होगा और इसका उद्देश्य वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले यात्रियों पर नियंत्रण पाना है। भारतीय नागरिकों को इस नियम से राहत मिली है, लेकिन पड़ोसी देशों के नागरिकों को चिंता का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस नए नियम के बारे में और क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

अमेरिका में यात्रा के लिए नए वीजा नियम

वाशिंगटन: यदि आप भविष्य में अमेरिका की यात्रा या व्यापार के लिए जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिकी प्रशासन ने इमिग्रेशन नियमों को और सख्त करते हुए एक नया निर्णय लिया है, जो विदेश यात्रा करने वालों के लिए वित्तीय बोझ बढ़ा सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 'वीजा बॉन्ड प्रोग्राम' को स्थायी रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। इस नए नियम के तहत, अमेरिका का वीजा प्राप्त करने के लिए कई देशों के आवेदकों को अब एक बड़ी राशि सुरक्षा के रूप में जमा करनी होगी।


20,000 डॉलर की सुरक्षा राशि


नई अधिसूचना के अनुसार, बिजनेस (B-1) और टूरिस्ट (B-2) वीजा के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को वीजा मिलने से पहले 20,000 डॉलर, जो लगभग 17 लाख रुपये के बराबर है, का बॉन्ड जमा करना होगा। यह नियम 3 अगस्त से प्रभावी होगा। इसके लागू होने के बाद, वीजा अधिकारी किसी भी योग्य आवेदक से यह बड़ी राशि जमा कराने का अधिकार रखेंगे। पहले इस योजना में 5,000 डॉलर का विकल्प था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।


भारत के लिए राहत, लेकिन पड़ोसी देशों में चिंता


ट्रंप प्रशासन का यह कड़ा नियम वर्तमान में 50 देशों के नागरिकों पर लागू है, जिनमें अधिकांश अफ्रीकी देश शामिल हैं। हालांकि, भारतीय नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि भारत का नाम इस सूची में नहीं है, इसलिए भारतीयों को टूरिस्ट या बिजनेस वीजा के लिए कोई अतिरिक्त सुरक्षा राशि नहीं देनी होगी। लेकिन, भारत के पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के नागरिकों को इस सूची में शामिल किया गया है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में अन्य देशों को भी इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है।


ओवरस्टे रोकने के लिए उठाया गया कदम


अमेरिका ने इस वीजा बॉंड योजना को 2025 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था, जिसका उद्देश्य उन यात्रियों पर नियंत्रण पाना था, जो वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रह जाते हैं। अमेरिकी सरकार का दावा है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सकारात्मक रहे हैं, इसलिए इसे स्थायी रूप दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि जमा करने के डर से लोग वीजा की शर्तों का पालन करेंगे और समय पर अपने देश लौटेंगे। दूसरी ओर, इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सामान्य यात्रियों पर भी आर्थिक बोझ डालेगा, जो केवल घूमने या वैध कार्य के लिए अमेरिका जाना चाहते हैं।