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आरबीआई की नई योजना: डिजिटल ठगी के लिए मुआवजा प्रणाली

आरबीआई ने डिजिटल ठगी के मामलों में मुआवजे की नई योजना का प्रस्ताव रखा है, जो ग्राहकों को सुरक्षा और राहत प्रदान करेगी। यदि किसी डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी होती है, तो पीड़ित को नुकसान का एक बड़ा हिस्सा वापस मिलेगा। इस योजना के तहत, ग्राहकों को त्वरित राहत मिलेगी और बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा। जानें इस प्रस्ताव की सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ और ठगी की स्थिति में क्या करें।
 

डिजिटल ठगी की बढ़ती समस्या

नई दिल्ली: आजकल यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट ट्रांसफर ने पैसे भेजने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है, जिससे यह सेकंडों में संभव हो जाता है। हालांकि, इस सुविधा के साथ-साथ डिजिटल धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। फर्जी कॉल, लिंक या संदेशों के माध्यम से लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं और उनके खातों से पैसे गायब हो रहे हैं। ऐसे में पीड़ितों के लिए अपने पैसे वापस पाना एक चुनौती बन गया था। अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस समस्या का समाधान खोजने की दिशा में कदम उठाया है।


मुआवजे की सीमा और शर्तें

आरबीआई द्वारा 6 मार्च 2026 को जारी किए गए ड्राफ्ट प्रस्ताव में छोटे धोखाधड़ी के मामलों के लिए मुआवजा देने की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। यदि किसी डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी के कारण 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है, तो पीड़ित को नेट लॉस का 85% या 25,000 रुपये (जो भी कम हो) मुआवजा मिलेगा। यह राशि केवल एक बार दी जाएगी। छोटे नुकसान के मामलों में आरबीआई अधिकतर मुआवजे का भार उठाएगा, जबकि बैंक और प्राप्तकर्ता बैंक भी इसमें योगदान देंगे। इससे ग्राहकों को त्वरित राहत मिलेगी।


आरबीआई का ड्राफ्ट कब और क्यों जारी हुआ?

आरबीआई ने 'कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजेक्शंस' के फ्रेमवर्क की समीक्षा के लिए ड्राफ्ट 6 मार्च 2026 को जारी किया। फरवरी में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति में इस दिशा में कदम उठाने की बात की थी। यह नियम 1 जुलाई 2026 से इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर लागू हो सकता है। वर्तमान में, 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं।


फ्रॉड होने पर क्या करें?

यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो सबसे पहले तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक है। घटना के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर अपने बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें। समय पर रिपोर्ट करने से मुआवजा प्रक्रिया शुरू होगी। बैंक को 5 दिनों के भीतर मुआवजा देने का प्रावधान है, जिसके बाद वह आरबीआई से रिम्बर्समेंट ले सकेगा।


किस प्रकार के मामलों में मिलेगा पूरा लाभ?

यदि धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही के कारण हुई है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होगी और पूरा पैसा वापस मिलेगा। यदि थर्ड-पार्टी ब्रेक में भी 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट की जाती है, तो राहत मिलेगी। यह प्रस्ताव ग्राहकों की सुरक्षा को बढ़ाने और शिकायतों के निपटान को तेज करने पर केंद्रित है। छोटे धोखाधड़ी के मामलों में अब डर कम होगा।


इस प्रस्ताव का महत्व

डिजिटल भुगतान के बढ़ने के साथ-साथ धोखाधड़ी के मामले भी बढ़े हैं। यह मुआवजा योजना ग्राहकों को सुरक्षित महसूस कराएगी और बैंकिंग पर विश्वास को मजबूत करेगी। एक बार की यह सुविधा लोगों को सतर्क भी बनाएगी। अंतिम नियम आने के बाद डिजिटल दुनिया और सुरक्षित बनेगी। यदि आप डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करते हैं, तो सतर्क रहें और शिकायत में देरी न करें।