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आरबीआई ने 135 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए, जानें इसका प्रभाव

भारतीय रिजर्व बैंक ने 135 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं, जिससे आम लोगों के मन में अपने लोन और निवेश को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इस लेख में जानें एनबीएफसी की कार्यप्रणाली, पुराने लोन पर प्रभाव, और निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, जानें कैसे चेक करें कि कोई फाइनेंस कंपनी आरबीआई से मान्यता प्राप्त है या नहीं।
 

मुंबई में आरबीआई की सख्त कार्रवाई

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के वित्तीय क्षेत्र को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आरबीआई ने 135 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। इन कंपनियों में पश्चिम बंगाल से लेकर मुंबई तक की कई संस्थाएं शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद आम जनता के मन में अपने पैसे और लोन के बारे में कई सवाल उठ रहे हैं।


एनबीएफसी की कार्यप्रणाली

क्या होती हैं एनबीएफसी और कैसे करती हैं काम

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां आम बैंकों की तरह लोन देने, निवेश करने और शेयर या बॉंड खरीदने जैसी वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं। हालाँकि, इनके पास बैंकिंग का लाइसेंस नहीं होता, जिसका अर्थ है कि ये ग्राहकों से सेविंग या करंट अकाउंट के माध्यम से डिपॉजिट नहीं ले सकतीं। इसके अलावा, ये कंपनियां अपने चेक जारी नहीं कर सकतीं और इनके पास कोई पेमेंट सेटलमेंट सिस्टम नहीं होता।


पुराने लोन पर प्रभाव

चल रहे पुराने लोन पर क्या पड़ेगा असर

आरबीआई की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाना है। नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों को हटाकर वित्तीय बाजार को सुरक्षित बनाया गया है। जिन ग्राहकों का इन 135 कंपनियों में से किसी के पास लोन है, उनका लोन पहले की तरह चलता रहेगा। ग्राहकों को अपना लिया हुआ कर्ज चुकाना होगा, लेकिन ये कंपनियां अब नए लोन नहीं दे सकेंगी।


निवेश से पहले ध्यान देने योग्य बातें

निवेश करने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल

यदि आप भविष्य में किसी एनबीएफसी में एफडी या अन्य स्कीम में निवेश करने का विचार कर रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे पहले, सुनिश्चित करें कि कंपनी के पास आरबीआई का वैध सर्टिफिकेट है। निवेश से पहले हमेशा क्रिसिल या इकरा जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियों द्वारा दी गई क्रेडिट रेटिंग की जांच करें और 'AAA' या 'AA' रेटिंग वाली कंपनियों पर भरोसा करें। याद रखें कि बैंकों में आपका पांच लाख रुपये तक का जमा पैसा डीआईसीजीसी (DICGC) के नियमों के तहत सुरक्षित रहता है, जबकि एनबीएफसी में जमा पैसे पर ऐसी कोई गारंटी नहीं होती।


फाइनेंस कंपनी की असलियत कैसे चेक करें

ऐसे चेक करें फाइनेंस कंपनी की असलियत

आप आसानी से यह पता कर सकते हैं कि कोई फाइनेंस कंपनी आरबीआई से मान्यता प्राप्त है या नहीं। इसके लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। मेन्यू बार में साइटमैप पर क्लिक करें और फाइनेंशियल सेक्टर के विकल्प को चुनें। साइटमैप में एनबीएफसी का लिंक मिलेगा, जिस पर क्लिक करने से एक अपडेटेड एक्सेल फाइल डाउनलोड होगी। इस लिस्ट में आप अपनी कंपनी का नाम सर्च करके उसका रजिस्ट्रेशन नंबर और ऑफिस का पता जान सकते हैं। यदि कंपनी का नाम वैध लिस्ट में नहीं है, तो इसका नाम कैंसिल सर्टिफिकेट वाली सूची में होगा।