आसाराम ने जोधपुर जेल में किया सरेंडर, हाई कोर्ट का फैसला बरकरार
आसाराम का सरेंडर
जोधपुर: खुद को भगवान मानने वाले आसाराम ने गुरुवार शाम को जोधपुर सेंट्रल जेल में अधिकारियों के समक्ष सरेंडर कर दिया। यह घटना राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा 2013 में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अंतरिम जमानत रद्द करने के एक दिन बाद हुई।
उनके आगमन की सूचना मिलते ही जोधपुर एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों की बड़ी संख्या इकट्ठा हो गई। उन्होंने अपने वाहन से अनुयायियों का अभिवादन किया और आशीर्वाद दिया, इसके बाद वे अपने आश्रम के लिए रवाना हुए।
सरेंडर की प्रक्रिया
स्थानीय आश्रम में कुछ समय बिताने के बाद, आसाराम ने मेडिकल जांच के लिए AIIMS का दौरा किया और फिर शाम को सरेंडर कर दिया। जोधपुर हाई कोर्ट की बेंच ने बुधवार को उनकी अपील को खारिज कर दिया और उनकी अंतरिम जमानत को रद्द कर दिया, जो पहले 7 जुलाई तक बढ़ाई गई थी।
आसाराम के वकील की प्रतिक्रिया
फैसला सुनाए जाने के समय आसाराम अक्टूबर से जमानत पर थे और उत्तराखंड के हरिद्वार में निवास कर रहे थे। उनके वकील ने बताया कि वे कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं और उसी के अनुसार हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना बना रहे हैं।
कोर्ट का निर्णय
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने इस मामले में विस्तृत निर्णय सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। आदेश सुनाते समय, बेंच ने पीड़िता पर इस अपराध के प्रभाव को लेकर गंभीर टिप्पणियां कीं।
कोर्ट ने पीड़िता की जन्मतिथि का उल्लेख करते हुए कहा कि उसका जन्म 4 जुलाई को हुआ था, जो अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। बेंच ने यह भी कहा कि 15 अगस्त 2013 की रात, जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, जोधपुर में एक झोपड़ी के भीतर उस लड़की की स्वतंत्रता और मासूमियत को एक ऐसे व्यक्ति द्वारा छीन लिया गया, जिसे वह भगवान मानती थी।