इंदौर में दूषित पानी से मची हाहाकार, प्रशासन की विफलता उजागर
इंदौर में पानी की समस्या
इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से एक चिंताजनक खबर आई है, जिसने नगर निगम और प्रशासन के दावों की वास्तविकता को उजागर कर दिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हाहाकार मच गया है। सरकारी आंकड़ों और वास्तविकता के बीच मौतों की संख्या में असमानता है, लेकिन अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या प्रशासन की विफलता को दर्शाती है।
मौतों की संख्या पर विवाद
मौतों के आंकड़ों पर 'सफेद झूठ' और जमीनी सच
भागीरथपुरा में हुई इस त्रासदी में कई लोगों की मौत की खबरें हैं, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह संख्या 15 तक पहुंच चुकी है। दूसरी ओर, इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) माधव प्रसाद हसनी का कहना है कि आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल 4 मौतें दर्ज हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि और सबूत मिले तो आंकड़ों को अपडेट किया जाएगा।
खतरनाक पानी की रिपोर्ट
सीवेज मिला पानी पी रहे थे लोग: चौंकाने वाली रिपोर्ट
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। इंदौर नगर निगम (IMC) द्वारा लिए गए 50 पानी के नमूनों में से 26 में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नलों के जरिए सप्लाई हो रहे पीने के पानी में सीवेज के बैक्टीरिया मौजूद थे। इसका मतलब है कि स्वच्छता के शीर्ष पर बैठे शहर के लोग अनजाने में गंदा पानी पी रहे थे।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या
अब भी ICU में 32 मरीज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक 1400 से अधिक लोग उल्टी-दस्त और संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में 272 मरीजों को भर्ती कराया गया है, जिनमें से 32 की हालत गंभीर है और वे ICU में जीवन-मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रशासन ने लोगों को नल का पानी न पीने और केवल उबला हुआ या टैंकर का पानी इस्तेमाल करने की सख्त सलाह दी है।
परिवार का दर्द
"हमें पैसा नहीं, अपना बच्चा चाहिए"
इस त्रासदी के बीच एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब एक पीड़ित परिवार ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए 2 लाख रुपये के मुआवजे को ठुकरा दिया। परिजनों ने आंसुओं के साथ कहा, "सरकार का पैसा हमारे बच्चे को वापस नहीं ला सकता।" यह बयान प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ जनता के गुस्से को दर्शाता है।