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ईरान के लिए फंसी 40 टन दवाएं: अमेरिका के हमले का असर

ईरान में चल रहे युद्ध के कारण 40 टन दवाएं नई दिल्ली में फंसी हुई हैं, जिनका ईरान भेजना मुश्किल हो गया है। अमेरिकी हवाई हमले ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूतावास अब वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है, लेकिन सुरक्षा चिंताओं के चलते यह कार्य चुनौतीपूर्ण है। जानें इस संकट के पीछे की पूरी कहानी और भारत में जुटाए गए दान के बारे में।
 

नई दिल्ली में फंसी दवाओं का संकट

नई दिल्ली: ईरान में चल रहे गंभीर युद्ध के कारण एक बड़ा मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि इसका सीधा प्रभाव आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। इस बीच, एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। भारत में खरीदी गई 40 टन दवाओं की एक बड़ी खेप नई दिल्ली में फंसी हुई है और इसे ईरान भेजने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। ये दवाएं ईरान के दूतावास द्वारा भारत में प्राप्त भारी दान की मदद से खरीदी गई थीं, ताकि युद्ध के इस कठिन समय में अपने देश के लोगों को आवश्यक चिकित्सा और राहत प्रदान की जा सके। लेकिन, वर्तमान हालातों ने इस योजना को विफल कर दिया है और यह जीवनरक्षक सामग्री अब खुद एक फंसी हुई मदद बन गई है।


अमेरिकी हवाई हमले का प्रभाव

अमेरिकी हवाई हमले ने कैसे बिगाड़ा पूरा प्लान?

ईरानी दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समस्या की शुरुआत पिछले हफ्ते हुई, जब ईरान के मशहद एयरपोर्ट पर एक अमेरिकी हवाई हमले में महान एयर का विमान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। यही विमान नई दिल्ली से दवाओं की इस बड़ी खेप को लेकर वापस तेहरान जाने वाला था। इस बमबारी के बाद यह योजना पूरी तरह से ठप हो गई। अधिकारी के अनुसार, जिस विमान को लोगों की जान बचाने के लिए दवाएं ले जानी थीं, उसे ही हमले का निशाना बना दिया गया। अब दूतावास इन दवाओं को भेजने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है, लेकिन युद्ध के मौजूदा हालातों में यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण और नामुमकिन सा प्रतीत हो रहा है।


40 टन दवाओं की खेप और सुरक्षा के मुद्दे

40 टन की सबसे बड़ी खेप और सुरक्षा का बढ़ता खतरा

दूतावास के सूत्रों के अनुसार, यह अब तक की सबसे बड़ी मेडिकल खेप है, जिसकी ईरान को इस समय सबसे अधिक आवश्यकता है। इससे पहले, दवाओं की दो छोटी खेपें आर्मेनिया के रास्ते तेहरान भेजी जा चुकी हैं, लेकिन 40 टन का यह विशाल कार्गो उस रास्ते से भेजना आसान नहीं है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि समस्या केवल परिवहन की नहीं है, बल्कि रास्ते की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। हाल के दिनों में ईरान में दवा कंपनियों और चिकित्सा सुविधाओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ईरानी दूतावास ने 30 मार्च को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा था कि दवाएं और चिकित्सा उपकरण ले जा रहे विमान पर हमला करना सीधे तौर पर एक युद्ध अपराध है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।


भारत में दान से खरीदी गई दवाएं

भारत में डोनेशन से जुटाई गई थी दवाओं की रकम

इस मामले में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि इन जीवनरक्षक दवाओं को खरीदने के लिए ईरानी दूतावास ने भारत में दान जुटाया था। शुरुआत में यह दान उनके मुख्य बैंक खाते में लिया गया था, लेकिन बाद में नियमों का पालन करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में एक अलग खाता खोला गया। हालांकि, राजनयिक संबंधों के तहत वियना समझौते में इस तरह के फंड जुटाने पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, लेकिन इसके लिए मेजबान देश से बैंकिंग सुविधाओं की अनुमति लेना आवश्यक होता है। इस बीच, भारत सरकार ने भी मानवीय आधार पर ईरान को दवाओं की एक अलग खेप भेजी है, लेकिन नई दिल्ली में फंसी 40 टन दवाएं अब भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए किसी सुरक्षित उड़ान का इंतजार कर रही हैं।