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ईरान ने अमेरिका को भेजे 20 तेल से भरे जहाज, ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और केवल मित्र राष्ट्रों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका को 20 बड़े तेल से भरे जहाज भेजे हैं। ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया और सैन्य कार्रवाई के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के समय के परमाणु समझौते की आलोचना की और एक नए, सख्त समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया।
 

ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने का निर्णय

वॉशिंगटन: अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान अब केवल उन देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिन्हें वह 'मित्र राष्ट्र' मानता है। इस स्थिति में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण दावा किया है।


ट्रंप के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को तेल से लदे 20 बड़े जहाज भेजे हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैं इसे पूरी तरह से परिभाषित नहीं कर सकता, लेकिन मुझे लगता है कि यह ईरान की ओर से सम्मान का संकेत है। यह प्रक्रिया कल सुबह से शुरू होगी और अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगी।'


अपने विमान 'एयर फोर्स वन' में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान अब समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है। उन्होंने बताया कि पहले ईरान 10 जहाज भेजने पर सहमत था, लेकिन बाद में इस संख्या को बढ़ाकर 20 कर दिया गया।


ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सीधे और मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत कर रहा है। हालांकि, बातचीत के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई भी जारी है। उन्होंने कहा, 'आज हमने उनके कई लक्ष्यों को तबाह कर दिया है। उनकी नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है। हम बातचीत भी कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर कड़ा प्रहार भी कर रहे हैं।'


ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में 2015 में हुए परमाणु समझौते की फिर से आलोचना की। उन्होंने इसे 'देश के इतिहास का सबसे खराब और मूर्खतापूर्ण सौदा' बताया। ट्रंप का कहना है कि यदि वह समझौता समाप्त नहीं किया गया होता, तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार होते। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब एक नया और अधिक सख्त समझौता चाहता है, जो ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं पर पूरी तरह नियंत्रण सुनिश्चित करे।