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ईरान में नए साल के साथ बढ़ा विरोध प्रदर्शन, सात की मौत

नए साल की शुरुआत के साथ, ईरान में विरोध प्रदर्शनों का माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया है। हालिया घटनाओं में कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। ये प्रदर्शन बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक फैल गए हैं, जिसमें छात्र और आम लोग सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। अमेरिका में निर्वासन में रह रहे शाह के बेटे ने भी इन प्रदर्शनों का समर्थन किया है। जानें इस संकट की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 

ईरान में विरोध प्रदर्शनों का बढ़ता तनाव

नए साल की शुरुआत के साथ, ईरान में स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है। पिछले एक हफ्ते से चल रहे प्रदर्शनों ने अब हिंसक रूप धारण कर लिया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। यह जानकारी ईरानी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से प्राप्त हुई है।


प्रदर्शन का विस्तार

नए साल के आगमन के साथ, यह विरोध केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैल गया है। राजधानी तेहरान से लेकर पश्चिमी और दक्षिणी प्रांतों तक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हो रही हैं। पहले, तेहरान की विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर “तानाशाह को मौत” जैसे नारे लगाए थे। कई स्थानों पर 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के शासक शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समर्थन में भी नारे सुनाई दिए।


शाह के बेटे का समर्थन

अमेरिका में निर्वासन में रह रहे शाह के बेटे रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पर इन प्रदर्शनों के समर्थन में एक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि वह ईरान के लोगों के साथ हैं और यह भी दावा किया कि मौजूदा शासन के तहत देश की आर्थिक स्थिति और बिगड़ती जाएगी।


महंगाई और आर्थिक संकट

ये विरोध प्रदर्शन पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़े माने जा रहे हैं, जिनका मुख्य कारण तेजी से बढ़ती महंगाई और मुद्रा की गिरती कीमतें हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी ईरान के लोर्देगन, कुहदश्त और इस्फहान जैसे क्षेत्रों में मौतों की खबरें आई हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े मीडिया संस्थानों ने लोर्देगन में झड़पों के दौरान दो लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यहां सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई लोग मारे गए और घायल हुए।


सुरक्षा बलों की कार्रवाई

कुहदश्त में बसीज स्वयंसेवी बल के एक सदस्य की मौत की पुष्टि हुई है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने हालात का फायदा उठाया, जबकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मृतक प्रदर्शन में शामिल था और उसे सुरक्षा बलों ने गोली मारी है। इस्फहान प्रांत में भी एक प्रदर्शनकारी की मौत की खबर है, हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।


विरोध का फैलाव

प्रदर्शन मार्वदश्त, करमानशाह, खुज़ेस्तान और हमदान जैसे क्षेत्रों में भी फैल गए हैं, जहां कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। बाजार बंद हैं और व्यापारी, छात्र और आम लोग सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ सड़कों पर हैं। हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने सख्त सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं, साथ ही संवाद की बात भी कही है। सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने कहा है कि व्यापारी संगठनों और यूनियनों से बातचीत की जाएगी।


आर्थिक दबाव का प्रभाव

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव में है। दिसंबर में महंगाई दर 42 प्रतिशत से अधिक बताई गई है और 2025 के दौरान ईरानी रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले लगभग आधी रह गई है। जून में इज़रायल और अमेरिका के हवाई हमलों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यही आर्थिक दबाव मौजूदा जनआक्रोश का मुख्य कारण बन रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।