ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फांसी की सजा का खतरा
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की गंभीर स्थिति
नई दिल्ली में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां ईरान में सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, 10,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। ईरानी प्रशासन ने अब आंदोलन से जुड़े एक मामले में पहली बार फांसी की सजा लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
फांसी की सजा का मामला
मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 26 वर्षीय एरफान सोल्तानी को जल्द ही फांसी दी जा सकती है। उन पर खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है। सोल्तानी का संबंध कराज शहर के फर्दीस इलाके से है, और उन्हें 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।
डर का संदेश?
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह पहली बार होगा जब किसी प्रदर्शनकारी को फांसी दी जाएगी। इससे पहले, सरकार विरोधी गतिविधियों को कुचलने के लिए गोली मारकर मौत की सजा देने की घटनाएं सामने आई हैं। इजराइल और अमेरिका में स्थित न्यूज पोर्टल Jfeed के अनुसार, सोल्तानी का मामला भविष्य में और कड़ी कार्रवाई का संकेत हो सकता है, जिससे लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने से डरें।
न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल
नॉर्वे में पंजीकृत कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का गंभीर उल्लंघन बताया है।
बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन
रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद से एरफान सोल्तानी को स्वतंत्र वकील से मिलने की अनुमति नहीं दी गई और न ही उन्हें अदालत में अपना बचाव पेश करने का मौका मिला। उनके परिवार को भी काफी समय तक यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस सुरक्षा एजेंसी ने हिरासत में लिया है।
आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता
लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई उद्यमी मारियो नॉफल ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों में अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरान में 28 दिसंबर को बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो अब देश के अन्य शहरों में फैल चुके हैं।
एक बड़ा जनआंदोलन
यह आंदोलन ईरान की सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ा राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन माना जा रहा है, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता गहराती जा रही है।