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ईरान संकट: इंटरनेट सेवाओं पर मंडरा रहा खतरा

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद, वैश्विक स्तर पर तेल संकट के साथ-साथ इंटरनेट सेवाओं पर भी खतरा मंडरा रहा है। समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स युद्ध के कारण प्रभावित हो सकती हैं, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है। जानें इस संकट का विस्तार से।
 

दुनिया भर में तेल संकट और इंटरनेट पर प्रभाव

नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले के बाद से पिछले एक महीने से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहरा गया है, और अब इंटरनेट सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है। दरअसल, खाड़ी देशों के आसपास समुद्र में उच्च गति वाले इंटरनेट केबल्स बिछे हुए हैं, जो युद्ध के कारण खतरे में पड़ गए हैं। ध्यान देने योग्य है कि होरमुज की खाड़ी से विश्व का 20 प्रतिशत और भारत का 40 प्रतिशत तेल गुजरता है, लेकिन इसके नीचे इंटरनेट केबल्स भी हैं, जिन पर वैश्विक संचार निर्भर करता है।


इंटरनेट की स्पीड पर संभावित प्रभाव

यदि युद्ध जारी रहता है, या समुद्र के नीचे माइन विस्फोट होते हैं, तो केबल्स को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की गति धीमी हो सकती है या सेवाएं ठप हो सकती हैं। उल्लेखनीय है कि विश्व का लगभग 95 प्रतिशत डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के माध्यम से ट्रांसफर होता है, जो समुद्र के नीचे बिछी हुई हैं। भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली मुख्य केबल्स भी इसी समुद्री मार्ग के पास हैं, जहां वर्तमान में संघर्ष चल रहा है।


भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर

भारत का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से गुजरता है। यदि इस मार्ग पर केबल्स को नुकसान होता है, तो इंटरनेट ट्रैफिक को लंबे पैसिफिक रूट पर डायवर्ट करना पड़ेगा, जिससे डेटा ट्रैवल टाइम बढ़ जाएगा। इससे इंटरनेट की स्पीड में कमी आएगी, जिससे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफार्मों पर वीडियो अपलोड और डाउनलोड में देरी हो सकती है। वीडियो कॉल और क्लाउड सेवाओं में भी समस्याएं आ सकती हैं। भारत का आईटी और आईटी आधारित सेवाओं का कारोबार लगभग 23.5 लाख करोड़ रुपये का है, और यदि इंटरनेट की स्पीड धीमी होती है, तो देश को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।