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उज्जैन में बाबा महाकाल की भस्म आरती में श्रद्धालुओं की भारी भीड़

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया के अवसर पर भस्म आरती का आयोजन हुआ। इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन किए। सुबह की आरती के दौरान मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वस्त्र पहनकर इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। जानें इस अद्भुत अनुभव के बारे में और कैसे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर इस अवसर का आनंद लिया।
 

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का आयोजन

उज्जैन - भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया के अवसर पर सोमवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस अद्भुत दृश्य का अनुभव करने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए।


सोमवार की सुबह भगवान वीरभद्र की अनुमति के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। भस्म आरती और दिव्य शृंगार के बाद जब श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए, तो पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रों का उच्चारण हो रहा था।


महाकाल मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत का उपयोग किया गया। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान पहले घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती का आयोजन किया गया। बाबा महाकाल का फूलों, सूखे मेवों और भांग से शृंगार किया गया।


महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती का आयोजन किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने बीती रात से ही कतार में खड़े होकर इंतजार किया। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है।


परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं।