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उत्तर प्रदेश में SM NET के समन्वयकों की सेवा बहाली की मांग

उत्तर प्रदेश में SM NET के समन्वयकों ने उप-मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर अपनी सेवाओं की बहाली की मांग की है। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए SM NET के महत्व को रेखांकित किया। धरने में शामिल कर्मचारियों ने सरकार की शिथिलता और लालफीताशाही का आरोप लगाते हुए जल्द कार्रवाई की अपील की। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 

लखनऊ में SM NET के समन्वयकों का ज्ञापन


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क (SM NET) के प्रतिनिधियों ने उप-मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपकर समन्वयकों की सेवा बहाली की मांग की। इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए पाठक ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि SM NET के तहत कल लखनऊ के इको गार्डन में समन्वयकों और बीएमसी साथियों ने धरना-प्रदर्शन किया था।


धरने के दौरान वक्ताओं ने सरकार को बताया कि 2001 में UNICEF द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए SM NET की स्थापना की गई थी। इस नेटवर्क ने पोलियो उन्मूलन, कोविड-19 प्रबंधन, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


हालांकि, 31 मार्च 2026 को यूनिसेफ द्वारा SM NET को बंद करने के निर्णय ने लगभग 555 कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आजीविका का संकट पैदा कर दिया है। कर्मचारियों ने बताया कि फरवरी 2026 में प्रदेश सरकार ने SM NET के संचालन के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


धरनारत कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग की शिथिलता और लालफीताशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि SM NET के पुनर्संचालन और कर्मचारियों के पुनर्नियोजन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने शासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की और शाम को स्वास्थ्य महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा। यदि कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला, तो उन्होंने बृजेश पाठक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. राजेश सिंह, योगेश सिंह, हर्षित राज, ज्ञानेन्द्र कुमार आदि शामिल थे।