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उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की मांग में अचानक वृद्धि, अफवाहों का असर

उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की मांग में अचानक वृद्धि हुई है, जिससे कई जिलों में खपत दोगुनी हो गई है। अफवाहों के कारण बाजार में हड़कंप मच गया है, और लोग ईंधन भरवाने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं। राजधानी लखनऊ में भी स्थिति गंभीर है, जहां डीजल और पेट्रोल की खपत में भारी उछाल आया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अफवाहों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
 

पेट्रोल-डीजल की खपत में अप्रत्याशित उछाल

प्रदेश में अचानक बढ़ी मांग, कई जिलों में खपत दोगुनी से ज्यादा

डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाहों ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है। 24 से 26 मार्च के बीच, पेट्रोल की औसत बिक्री में 77 प्रतिशत और डीजल की बिक्री में 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि सामान्य दिनों की तुलना में असामान्य मानी जा रही है। कई जिलों में ईंधन की खपत सामान्य स्तर से दोगुनी से भी अधिक हो गई, जिससे आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया।


पूर्वांचल में सबसे अधिक प्रभाव

अफवाहों का सबसे अधिक प्रभाव पूर्वांचल के जिलों में देखा गया है, जहां लोगों में घबराहट साफ नजर आई। देवरिया, कौशाम्बी, गोरखपुर, प्रयागराज और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में पेट्रोल की खपत 200 प्रतिशत से अधिक हो गई। डीजल की खपत में भी प्रतापगढ़ (230%), देवरिया (226%) और श्रावस्ती (189%) जैसे जिलों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। इस बढ़ती मांग के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।


लखनऊ में भी स्थिति गंभीर

राजधानी लखनऊ में भी इस स्थिति का असर स्पष्ट रूप से देखा गया। 24 मार्च को पेट्रोल की खपत सामान्य से केवल 3 प्रतिशत अधिक थी, लेकिन 25 मार्च को यह 42 प्रतिशत और 26 मार्च को 109 प्रतिशत तक पहुंच गई। डीजल की मांग में भी इसी तरह की तेजी आई, जो 100 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि अफवाहों का असर केवल छोटे जिलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े शहर भी इसकी चपेट में आ गए हैं।


एलपीजी सप्लाई पर भी असर

ईंधन की बढ़ती मांग का असर रसोई गैस की आपूर्ति पर भी पड़ा है। 26 मार्च को कुल 13.31 लाख सिलेंडर की बुकिंग हुई, लेकिन केवल 7.83 लाख सिलेंडर की डिलीवरी हो सकी। इसका मतलब है कि सप्लाई, मांग के मुकाबले लगभग 58 प्रतिशत ही रह गई। इंडियन ऑयल की डिलीवरी सबसे अधिक 4.32 लाख सिलेंडर रही, जबकि भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की आपूर्ति में अंतर देखने को मिला। यह स्पष्ट है कि अफवाहों का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घरेलू गैस की उपलब्धता पर भी दबाव बना।


सरकार का आश्वासन

हालांकि, सरकार और प्रशासन लगातार यह आश्वासन दे रहे हैं कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति केवल अफवाहों के कारण बनी है और लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी, लोग एहतियात के तौर पर अधिक मात्रा में ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे कृत्रिम संकट जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अफवाहों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।